पटना। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कथित ‘रिशुश्री महाघोटाला’ को लेकर राज्य सरकार पर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार से तीखे सवाल पूछते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और उच्चस्तरीय जवाबदेही की मांग की है।
फेसबुक पर साझा की गई अपनी विस्तृत पोस्ट में तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि राज्य में हजारों करोड़ रुपये के कथित घोटाले सामने आ रहे हैं, लेकिन 21 वर्षों से सत्ता में रही एनडीए सरकार अब तक स्पष्ट जवाब देने से बचती रही है।
“छोटों पर कार्रवाई, बड़े सुरक्षित” का आरोप
तेजस्वी ने दावा किया कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई केवल निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित है, जबकि कथित रूप से बड़े नामों को संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतने बड़े स्तर पर कथित अनियमितताओं के बावजूद असली जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।
टेंडर प्रक्रिया और सिस्टम पर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि एक सामान्य ठेकेदार के रूप में बताए जा रहे रिशुश्री को कई विभागों के टेंडर प्रभावित करने की शक्ति कैसे मिली। उन्होंने यह भी पूछा कि सरकारी निगरानी और नियंत्रण तंत्र वर्षों तक इस कथित नेटवर्क को रोकने में क्यों विफल रहा।
तेजस्वी ने कहा कि ईडी की जांच में सामने आए कथित चैट्स से यह संकेत मिलता है कि इस पूरे मामले का संबंध उच्च प्रशासनिक स्तर तक हो सकता है, जिसके कारण राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण पर सवाल उठते हैं।
चार्जशीट, गिरफ्तारी और जांच एजेंसियों पर सवाल
उन्होंने विशेष निगरानी इकाई (SVU) की चार्जशीट को लेकर भी सवाल खड़े किए और पूछा कि कुछ नामों को उसमें शामिल क्यों नहीं किया गया। साथ ही, दो निलंबित आईएएस अधिकारियों की गिरफ्तारी न होने पर भी उन्होंने सरकार को घेरा।
तेजस्वी यादव ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार संभावित बड़े खुलासों के डर से सख्त कार्रवाई से बच रही है।
संपत्ति, कमीशन और विदेशी दौरों का मुद्दा
अपने आरोपों में उन्होंने कहा कि जांच में कथित तौर पर अधिकारियों की विदेश यात्राओं, महंगे उपहारों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई पहलू सामने आए हैं। उन्होंने सवाल किया कि इतनी बड़ी वित्तीय गतिविधियां निगरानी एजेंसियों की नजर से कैसे बचीं।
इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि छापेमारी में बड़ी संख्या में संपत्ति दस्तावेज, नकदी और आभूषण बरामद होने की बातें सामने आई हैं, जिनकी स्वतंत्र जांच जरूरी है।
ई-टेंडरिंग और विभागीय जिम्मेदारी पर जोर
तेजस्वी ने पूछा कि जब टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह ई-टेंडरिंग पर आधारित है, तो कथित तौर पर किसी सिंडिकेट द्वारा उसे कैसे प्रभावित किया गया। उन्होंने ऑडिट और विजिलेंस सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि जिन विभागों में अनियमितताओं के आरोप हैं, उनके मंत्रियों को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।
निष्पक्ष जांच की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि कथित घोटाले में शामिल सभी लोगों पर समान रूप से कार्रवाई कब होगी।