अनुगुल। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में शनिवार को बालांगीर-बरगढ़-महासमुंद (बीबीएम) समिति से जुड़े 15 माओवादियों ने हथियार जमा कर राज्य के समन्वित अभियान और पुनर्वास नीति का लाभ उठाते हुए समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वालों में नौ महिलाएं और छह पुरुष शामिल हैं, जिनकी गतिविधियां ओडिशा के बालांगीर और बरगढ़ जिलों से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में भी सक्रिय थीं।

हथियारों का जखीरा सौंपा
सभी माओवादी सुरक्षा बलों के समक्ष कुल 14 हथियार जमा कराए, जिनमें 3 एके-47, 2 एसएलआर और 2 आईएनएसएएस राइफल शामिल थीं। गृह मंत्री और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि राज्य समिति सदस्य विकास उर्फ बबन्ना सहित सभी ने पुनर्वास नीति के तहत हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने का फैसला किया।

सीमावर्ती ओडिशा क्षेत्रों में भी प्रभाव
बीबीएम समिति ओडिशा के पश्चिमी जिलों में सक्रिय रही है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इस समूह के सदस्य सीमा पार जाकर दोनों राज्यों में गतिविधियां संचालित करते थे। महासमुंद में यह आत्मसमर्पण ओडिशा के बालांगीर और बरगढ़ जिलों के लिए भी राहतभरी खबर है।

पुनर्वास नीति और भविष्य की योजना
गृह मंत्री ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों को वित्तीय सहायता, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और परिवार सहित सुरक्षा दी जाएगी। दस्तावेजीकरण और पुनर्वास प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी गई है। छत्तीसगढ़ सरकार ने मार्च 2026 तक राज्य से माओवाद को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है।

सकारात्मक संकेत और शांतिपूर्ण विकास
सुरक्षा बलों का कहना है कि सघन अभियान, विकास कार्य और दोनों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में माओवादी प्रभाव कमजोर पड़ा है। अधिकारियों का मानना है कि आत्मसमर्पण की यह प्रवृत्ति पश्चिमी ओडिशा में स्थायी शांति और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।