छत्तीसगढ़। बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में एक अनोखा और पर्यावरण-अनुकूल नवाचार सामने आया है, जहां छिंद के उन बीजों से, जिन्हें अब तक अनुपयोगी माना जाता था, कैफीन-फ्री हर्बल कॉफी तैयार की जा रही है। इस पहल को स्थानीय स्तर पर नई पहचान मिल रही है और यह पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गई है।

यह नवाचार दंतेवाड़ा के बचेली निवासी युवा उद्यमी विशाल हालदार ने विकसित किया है। बीकॉम और सॉफ्टवेयर विकास की पढ़ाई कर चुके विशाल ने करीब दो वर्षों के शोध के बाद यह हर्बल कॉफी तैयार की है। उनका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए लोगों को कैफीन के बिना एक स्वस्थ पेय विकल्प उपलब्ध कराना है।

विशाल के अनुसार, कॉफी को लेकर लोगों में जो आदत और स्वाद की चाह है, उसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने ऐसा विकल्प तैयार किया है जो शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डाले बिना ऊर्जा का अनुभव दे सके। इस उत्पाद में छिंद के प्राकृतिक गुणों के कारण एंटीऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा पाई जाती है।

इस नवाचार को हाल ही में आयोजित इनोवेशन महाकुंभ में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ, जहां इसकी व्यापक सराहना हुई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी विशाल को सम्मानित किया। वहीं जगदलपुर स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में आयोजित प्रदर्शनी में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी सहित विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने भी इस पहल को सराहा।

विशाल केवल उत्पाद निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने पर भी काम कर रहे हैं। दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के यूथ अप कार्यक्रम के माध्यम से वे ग्रामीणों को उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रहे हैं, ताकि जंगलों में मिलने वाले छिंद जैसे संसाधनों से अतिरिक्त आय के अवसर बन सकें।

फिलहाल यह परियोजना परीक्षण और विकास के चरण में है, लेकिन इसके शुरुआती नतीजों ने उम्मीद जगाई है कि आने वाले समय में यह हर्बल कॉफी बस्तर की एक नई पहचान बन सकती है और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए एक मजबूत विकल्प साबित हो सकती है।