दिल्ली: जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन शुक्रवार को 14वें दिन में प्रवेश कर गया। आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लगातार छठे दिन भी अनशन पर रहे। लंबे समय से जारी उपवास के चलते उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ने लगा है और डॉक्टरों की टीम नियमित रूप से उनकी जांच कर रही है।

सोनम वांगचुक ने आंदोलन की गंभीरता पर जताई चिंता

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए वांगचुक ने कहा कि आंदोलन को एक गंभीर जनअभियान के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर निराशा जताई कि कुछ लोग आंदोलन स्थल पर केवल समय बिताने या सामाजिक गतिविधि के तौर पर पहुंच रहे हैं। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे आंदोलन के उद्देश्य को समझें और सक्रिय रूप से भागीदारी करें।

वांगचुक ने कहा कि यदि लोग आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाना चाहते हैं तो उन्हें कम से कम एक दिन का उपवास रखकर समर्थन देना चाहिए।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा संगठन

सीजेपी नेताओं का कहना है कि उनकी प्रमुख मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर यह विरोध प्रदर्शन चल रहा है और फिलहाल इसे समाप्त करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

शुक्रवार को संगठन की नेतृत्व टीम ने भी एक दिन का सांकेतिक उपवास रखा। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने समर्थकों से अपील की कि वे एक दिन का उपवास रखकर सोशल मीडिया के माध्यम से आंदोलन के प्रति अपना समर्थन दर्ज कराएं।

पुलिस बल की तैनाती को लेकर उठे सवाल

आंदोलनकारियों का आरोप है कि सरकार संवाद के बजाय दबाव की रणनीति अपना रही है। प्रदर्शन में शामिल लोगों के मुताबिक, गुरुवार देर रात जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। इससे प्रदर्शनकारियों के बीच प्रशासन की संभावित कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

हालांकि, पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अनशन का असर, कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ी

लंबे समय से जारी भूख हड़ताल का असर आंदोलन में शामिल छात्रों पर भी दिखाई देने लगा है। कई छात्रों के स्वास्थ्य में गिरावट दर्ज की गई है और कुछ को चिकित्सकीय सहायता की जरूरत पड़ी। एक छात्र की तबीयत ज्यादा खराब होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।

अभिजीत दीपके ने बताया कि डॉक्टरों की टीम लगातार स्वास्थ्य निगरानी कर रही है और जरूरतमंद छात्रों को उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।

सरकार के अगले कदम पर नजर

छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के समर्थन के बीच आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और बातचीत की कोई पहल होती है या नहीं।