नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने दिल्ली हाई कोर्ट में स्पष्ट किया है कि वह छात्रों की धार्मिक भावनाओं का पूरा सम्मान करता है और बकरीद (ईद-उल-अजहा) के दिन परीक्षा आयोजित किए जाने को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर सकारात्मक रुख अपनाएगा।

विश्वविद्यालय ने अदालत को बताया कि जो छात्र बकरीद के अवसर पर धार्मिक आयोजन में शामिल होना चाहते हैं, वे विधि संकाय के डीन को इसकी जानकारी दे सकते हैं। ऐसे छात्रों की परीक्षा बाद की तारीख पर पुनर्निर्धारित की जाएगी, जो 4 जुलाई के बाद आयोजित होगी।

याचिका में क्या था मुद्दा?

इस मामले में दायर याचिका में कहा गया था कि 28 मई को, जो कि सार्वजनिक अवकाश का दिन माना गया है, परीक्षा आयोजित करना मुस्लिम छात्रों के धार्मिक अधिकारों के खिलाफ है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि बकरीद जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व पर परीक्षा होने से छात्रों को परीक्षा और धार्मिक कर्तव्यों में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

डीयू का पक्ष

दिल्ली विश्वविद्यालय ने कोर्ट में कहा कि उसका उद्देश्य किसी भी छात्र की धार्मिक आस्था को आहत करना नहीं है। इसलिए जिन विद्यार्थियों को बकरीद मनानी है, उन्हें पहले से सूचना देने का विकल्प दिया गया है, ताकि उनकी परीक्षा बाद में कराई जा सके।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों को न तो परीक्षा से वंचित होना पड़े और न ही वे अपने धार्मिक पर्व से दूर रहें।

कोर्ट की टिप्पणी

दिल्ली हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय के इस आश्वासन को रिकॉर्ड में लेते हुए याचिका का निपटारा कर दिया। अदालत ने माना कि डीयू द्वारा अपनाया गया लचीला दृष्टिकोण छात्रों के हितों और संवेदनशीलता को ध्यान में रखता है।

व्यापक महत्व

यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि शैक्षणिक संस्थानों में परीक्षा कार्यक्रम और धार्मिक त्योहारों के बीच संतुलन बनाना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है। हालांकि, डीयू का यह निर्णय छात्रों की जरूरतों और धार्मिक स्वतंत्रता को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित कदम के रूप में देखा जा रहा है।

इस फैसले के बाद संबंधित छात्रों को राहत मिली है और वे बिना किसी बाधा के अपना धार्मिक पर्व मना सकेंगे।