उन्नाव: उन्नाव रेप पीड़िता और उनकी मां ने शनिवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) पर गहरा अविश्वास जताया। यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है, जब सीबीआई ने पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को मिली जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सीधे संवाद के बिना भरोसा नहीं
पीड़िता की मां ने कहा कि सीबीआई से भरोसा तभी होगा, जब एजेंसी उनसे सीधे मिले और बातचीत करे। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी अदालत में सेंगर की बेटी से बातचीत कर रहे थे, लेकिन पीड़िता से सीधे नहीं। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह पीड़िता को जानते हैं, तो उन्होंने अदालत में कहा, “मैं उसे क्यों जानूं?”

सीबीआई का साथ नहीं मिला तो स्थिति बिगड़ी
पीड़िता ने आरोप लगाया कि अगर सीबीआई उनके वकील के साथ निर्णायक समय पर खड़ी होती, तो आज यह हालात नहीं बनते। उन्होंने कहा, “अगर सीबीआई मजबूती से साथ होती, तो हमें जीत मिलती और सेंगर को हार का सामना करना पड़ता।”

परिवार की बदहाली का दर्द
पीड़िता ने अपने परिवार की मुश्किलें बयां करते हुए कहा कि उनके घर में पटाखे फूट रहे हैं, लेकिन उनके परिवार का सब कुछ बर्बाद हो गया। उन्होंने कहा कि उनके पिता की हत्या हो गई, उन्हें और उनके पति को नौकरी से निकाल दिया गया, और उनके दो नवजात बच्चे हैं।

न्याय व्यवस्था पर सवाल
पीड़िता ने आरोप लगाया कि एक परिवार को डराया गया और दूसरे को राहत दी गई। उनका कहना है कि यह अन्याय है कि एक परिवार को प्रताड़ित किया गया जबकि दूसरे को खुली छूट मिली।

सीबीआई की सुप्रीम कोर्ट में याचिका
इससे पहले शुक्रवार को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर दिल्ली हाईकोर्ट के 23 दिसंबर, 2025 के आदेश को चुनौती दी। उस आदेश में सेंगर की उम्रकैद सजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित करते हुए उन्हें जमानत दी गई थी।

सेंगर की सजा और जेल की स्थिति
कुलदीप सिंह सेंगर को दिसंबर 2019 में उन्नाव रेप केस में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 25 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। हालांकि उन्हें जमानत मिली है, लेकिन वह अभी जेल में रहेंगे क्योंकि उन्हें एक अन्य सीबीआई मामले में हत्या का 10 साल का कारावास भुगतना है।

सियासी और सामाजिक प्रतिक्रिया
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर पीड़िता का परिवार और विपक्षी दलों ने तीखी आलोचना की है। इस फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की मांग और तेज हो गई है।