नई दिल्ली। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राउज एवेन्यू कोर्ट में उनके खिलाफ दायर उस याचिका को खारिज करने की मांग की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि भारतीय नागरिकता मिलने से पहले ही उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज हो गया था। सोनिया गांधी ने इस याचिका को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया है।

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत में सोनिया गांधी की ओर से विस्तृत जवाब दाखिल किया गया। इसमें कहा गया है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप न केवल तथ्यहीन हैं, बल्कि कानून की मूल भावना के भी खिलाफ हैं। यह मामला अधिवक्ता विकास त्रिपाठी की ओर से दायर उस शिकायत से जुड़ा है, जिसमें दावा किया गया था कि जनवरी 1980 में नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में सोनिया गांधी का नाम शामिल किया गया, जबकि उन्होंने भारतीय नागरिकता वर्ष 1983 में प्राप्त की थी।

शिकायतकर्ता ने इस आधार पर धोखाधड़ी और सरकारी संस्थाओं को गुमराह करने जैसे आरोप लगाए थे। हालांकि, मजिस्ट्रेट अदालत ने सितंबर 2025 में इस शिकायत को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह मामला अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इसके बाद शिकायतकर्ता ने उच्च अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर आपराधिक कार्रवाई की मांग की।

अधिकार क्षेत्र को लेकर उठाया सवाल

सोनिया गांधी की ओर से अदालत को बताया गया कि नागरिकता से जुड़े विषय पूरी तरह केंद्र सरकार के दायरे में आते हैं, जबकि मतदाता सूची से संबंधित मामलों पर चुनाव आयोग का अधिकार होता है। ऐसे मुद्दों पर किसी निजी शिकायत के आधार पर आपराधिक अदालत में सुनवाई नहीं की जा सकती।

सबूतों की कमी का भी हवाला

जवाब में यह भी कहा गया कि शिकायत के साथ कोई मूल दस्तावेज या प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। कथित आवेदन या प्रक्रिया से जुड़ी कोई स्पष्ट तारीख या रिकॉर्ड तक पेश नहीं किया गया। इसके अलावा, यह मान लेना भी गलत है कि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में केवल एक आवेदन के आधार पर जोड़ दिया जाता है।

सोनिया गांधी के पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि चार दशक से अधिक पुराने आरोपों को दोबारा उठाना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि यह व्यक्ति की प्रतिष्ठा और मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन करता है। मामले की अगली सुनवाई 21 फरवरी को निर्धारित की गई है।