नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने संसद में आयकर व्यवस्था में बदलाव का सुझाव देते हुए शादीशुदा जोड़ों के लिए ‘ज्वाइंट इनकम टैक्स रिटर्न’ का विकल्प शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा टैक्स सिस्टम कई परिवारों के लिए असमानता पैदा करता है, खासकर उन दंपतियों में जहां दोनों की आय में बड़ा अंतर होता है।
अलग-अलग आय पर अलग टैक्स, परिवार पर पड़ता है असर
चड्ढा ने अपने प्रस्ताव को समझाते हुए उदाहरण दिया कि अगर पति-पत्नी दोनों 10-10 लाख रुपये कमाते हैं, तो कुल आय 20 लाख होने के बावजूद टैक्स देनदारी नहीं बनती। लेकिन अगर एक व्यक्ति ही 20 लाख रुपये कमाता है और दूसरा घर पर रहकर बच्चों की देखभाता है, तो उसी कुल आय पर करीब 1.92 लाख रुपये टैक्स देना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था व्यक्ति को अलग-अलग इकाई मानती है, जबकि वास्तविकता में परिवार एक आर्थिक इकाई के रूप में काम करता है। “एक घर, एक रसोई और एक बजट होने के बावजूद टैक्स के समय पति-पत्नी को अलग-अलग माना जाता है,” उन्होंने कहा।
क्या हो सकता है नया सिस्टम?
प्रस्तावित ज्वाइंट टैक्स फाइलिंग सिस्टम में पति-पत्नी की संयुक्त आय को आधार बनाकर टैक्स तय किया जा सकता है। इसके तहत:
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आयकर स्लैब को नए सिरे से तय किया जा सकता है, जैसे 6 लाख रुपये तक कोई टैक्स नहीं
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6 से 14 लाख रुपये तक 5% टैक्स और उससे अधिक आय पर उच्च दरें लागू हो सकती हैं
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स्टैंडर्ड डिडक्शन, छूट और सरचार्ज की सीमाओं को भी संयुक्त आय के अनुसार बदला जा सकता है
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यह विकल्प पूरी तरह वैकल्पिक होगा, यानी दंपति चाहें तो अलग-अलग या संयुक्त रूप से रिटर्न दाखिल कर सकेंगे
पहले भी आ चुका है प्रस्ताव
गौरतलब है कि इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया भी पहले केंद्र सरकार को शादीशुदा जोड़ों के लिए वैकल्पिक ज्वाइंट टैक्स सिस्टम लागू करने का सुझाव दे चुका है। यदि वित्त मंत्रालय इस दिशा में कदम उठाता है, तो व्यक्तिगत आयकर प्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
राघव चड्ढा के तीन बड़े सुझाव
राघव चड्ढा ने हाल ही में आम लोगों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए तीन प्रमुख सुधारों का प्रस्ताव रखा है:
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शादीशुदा जोड़ों के लिए ज्वाइंट टैक्स फाइलिंग का विकल्प
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घायल सैनिकों की डिसेबिलिटी पेंशन पर पूर्ण आयकर छूट बहाल करना
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बैंक खातों में न्यूनतम बैलेंस न रखने पर लगने वाली पेनल्टी खत्म करना