नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को उत्तम नगर में होली के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामले में आरोपियों के परिजनों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वे एमसीडी की संभावित बुलडोजर कार्रवाई को चुनौती देने के लिए अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित याचिका दाखिल करें।

न्यायमूर्ति अमित बंसल की पीठ ने कहा कि मौजूदा याचिका में लगाए गए आरोप स्पष्ट नहीं हैं और इसमें कई अलग-अलग मुद्दों को एक साथ जोड़ दिया गया है, जिससे मामला समझना कठिन हो रहा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि याचिका में एमसीडी द्वारा कथित रूप से अवैध तरीके से मकान गिराने से रोकने के साथ-साथ पुलिस सुरक्षा की मांग भी की गई है। अदालत के मुताबिक ये दोनों अलग-अलग विषय हैं और इन्हें एक ही याचिका में शामिल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसका अधिकार क्षेत्र केवल अवैध निर्माण, अतिक्रमण और ध्वस्तीकरण से जुड़े मामलों तक सीमित है।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत से वर्तमान याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी और बेहतर तथ्यों के साथ नई याचिका दाखिल करने की बात कही। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए एक सप्ताह के भीतर संशोधित याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी।

हालांकि अदालत ने फिलहाल किसी प्रकार का अंतरिम आदेश जारी नहीं किया, लेकिन एमसीडी की ओर से पेश वकील ने भरोसा दिलाया कि जिन संपत्तियों को लेकर मामला अदालत में लंबित है, उनके खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

इससे पहले मंगलवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने एमसीडी से कहा था कि उत्तम नगर में होली के दौरान हुई हिंसा और एक व्यक्ति की मौत के मामले में नामजद दो आरोपियों की संपत्तियों पर अगले दिन तक कोई कार्रवाई न की जाए।

वहीं दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत में कहा कि याचिका केवल ध्वस्तीकरण की आशंका के आधार पर दायर की गई है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि हत्या जैसी गंभीर घटना हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है और किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति से जुड़े मुद्दे के जरिए जांच को प्रभावित नहीं किया जा सकता।

उल्लेखनीय है कि उत्तम नगर में होली के दिन गुब्बारे से गिरे पानी को लेकर हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था, जिसमें 28 वर्षीय तरुण की हत्या कर दी गई थी।