नई दिल्ली। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने शनिवार को कहा कि वर्ष 2002 के गोधरा कांड के बाद गुजरात में हुई घटनाओं के समय वह तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचकों में शामिल थे, लेकिन बाद में राज्य में समय बिताने और विभिन्न समुदायों से संवाद करने के बाद उनकी सोच में बदलाव आया।

संविधान क्लब में पत्रकार-लेखक आलोक मेहता की पुस्तक ‘रिवोल्यूशनरी राज: नरेंद्र मोदीज 25 इयर्स’ के लोकार्पण कार्यक्रम में खान ने कहा कि यदि उन्होंने गोधरा के बाद चार महीने से अधिक समय गुजरात में रहकर आम लोगों से बातचीत नहीं की होती, तो संभवतः उनका दृष्टिकोण नहीं बदलता। उन्होंने कहा कि उन्हें महसूस हुआ कि मोदी के बारे में कई भ्रांतियां प्रचलित हैं। उनके अनुसार, मोदी दृढ़ निश्चयी नेता हैं और अपने लक्ष्यों को लेकर लगातार काम करते रहते हैं।

राज्यपाल ने वर्ष 2019 में लागू मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम, जिसे आमतौर पर तीन तलाक कानून कहा जाता है, का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुधार था। उन्होंने इस फैसले का श्रेय प्रधानमंत्री को देते हुए कहा कि आने वाले समय में इसे ऐतिहासिक कदम के रूप में देखा जाएगा।

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री के जे अल्फोंस समेत कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।

इस अवसर पर हरदीप सिंह पुरी ने भारत की आर्थिक प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2014 के बाद से देश की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है और भारत निकट भविष्य में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।