काठमांडू। नेपाल की राजधानी के उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र बालुवाटार में 16 फरवरी को चीन और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच एक गोपनीय बैठक होने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें नेपाल स्थित पाकिस्तानी दूतावास के रक्षा अताशे कर्नल हफीज उर रहमान भी मौजूद थे।

खुफिया सूत्रों का दावा है कि इस बैठक में भारत से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की गई। बताया जा रहा है कि अरुणाचल प्रदेश को लेकर कथित रूप से माहौल प्रभावित करने की रणनीति पर विचार-विमर्श हुआ। इनपुट के मुताबिक, नेपाल के कुछ स्थानीय पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मधेशिया समुदाय से जुड़े व्यक्तियों के साथ संपर्क साधने की योजना पर भी चर्चा हुई। भारतीय एजेंसियों को मिले संकेतों के आधार पर आशंका जताई गई है कि नेपाल की जमीन का उपयोग भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए करने की कोशिश हो सकती है।

सूत्रों के अनुसार करीब डेढ़ घंटे चली इस बैठक में कुल सात अधिकारी शामिल थे। चर्चा का एक बिंदु 20 फरवरी को मनाए जाने वाले अरुणाचल प्रदेश के स्थापना दिवस के आसपास संभावित दुष्प्रचार अभियान से जुड़ा बताया गया है। यह भी कहा जा रहा है कि कुछ स्थानीय व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें विशेष भूमिकाएं सौंपने की रूपरेखा तैयार की गई।

जानकारी के मुताबिक कथित योजना के तहत उन लोगों को प्राथमिकता दी गई, जिन्होंने हाल के वर्षों में चीन की यात्रा की थी। आरोप है कि इनमें से कुछ को पूर्वोत्तर भारत से संबंधित सूचनाएं जुटाने के लिए प्रेरित करने की तैयारी थी। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

खुफिया सूत्रों ने यह भी संकेत दिया है कि इस पूरी कवायद के पीछे चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की पश्चिमी थिएटर कमान से जुड़े कुछ अधिकारियों की भूमिका हो सकती है। उल्लेखनीय है कि हाल के महीनों में चीन ने नेपाल के ललितपुर और कीर्तिपुर में सांस्कृतिक एवं भाषा प्रचार से जुड़े केंद्र भी स्थापित किए हैं।

सूत्रों का यह भी कहना है कि काठमांडू में चीन और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच हाल के समय में कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। कुछ बैठकों में राजनयिक कार्यक्रमों के बहाने प्रतिनिधियों की मौजूदगी की बात भी कही जा रही है। एक अन्य बैठक में बलूचिस्तान की स्थिति और वहां चल रही परियोजनाओं पर भी चर्चा होने की जानकारी मिली है।

हालांकि, इन सभी दावों पर नेपाल, चीन या पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।