नई दिल्ली। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की मार्च 2026 रिपोर्ट में यमुना नदी की स्थिति और अधिक चिंताजनक होती दिखाई दे रही है। आंकड़ों के अनुसार नदी में फीकल कोलीफॉर्म का स्तर जनवरी और फरवरी की तुलना में कई स्थानों पर तेजी से बढ़ा है, जो साफ तौर पर अनुपचारित सीवेज के भारी प्रवाह की ओर इशारा करता है।
फीकल कोलीफॉर्म वे बैक्टीरिया होते हैं जो पानी में मल प्रदूषण की मौजूदगी को दर्शाते हैं और जल गुणवत्ता के गंभीर स्तर को बताते हैं।
आठ स्थानों से लिए गए सैंपल
DPCC ने यमुना के पल्ला, वजीराबाद, ISBT ब्रिज, ITO ब्रिज, निजामुद्दीन ब्रिज, हिंडन कट, ओखला बैराज और असगरपुर सहित आठ प्रमुख स्थानों से पानी के नमूने एकत्र किए।
रिपोर्ट में सबसे गंभीर स्थिति असगरपुर में दर्ज की गई, जहां मार्च में फीकल कोलीफॉर्म का स्तर 4,00,000 MPN/100 ml तक पहुंच गया। यह सुरक्षित सीमा 500 और अधिकतम मानक 2,500 से कई गुना अधिक है। यहां जनवरी में यह 3,50,000 था, जो फरवरी में घटकर 92,000 तक पहुंचा था, लेकिन मार्च में फिर से तेज उछाल देखा गया।
BOD स्तर भी चिंता का कारण
रिपोर्ट में यमुना का बॉयोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) स्तर भी खतरनाक पाया गया। विभिन्न स्थानों पर यह 2 से 60 mg/l के बीच दर्ज किया गया, जबकि सुरक्षित मानक अधिकतम 3 mg/l है।
असगरपुर में BOD 60 mg/l तक पहुंच गया, जो पिछले महीने 34 mg/l था। वहीं ISBT ब्रिज पर फीकल कोलीफॉर्म स्तर में कुछ सुधार जरूर दिखा, लेकिन अधिकांश स्थानों पर प्रदूषण बढ़ा हुआ पाया गया।
BOD पानी में मौजूद कार्बनिक प्रदूषण की मात्रा को दर्शाता है—जितना अधिक स्तर, उतना अधिक प्रदूषित पानी माना जाता है।
निगरानी पर उठे सवाल
पर्यावरण विशेषज्ञों और एक्टिविस्ट्स ने रिपोर्ट जारी होने में देरी पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि नदी में जल प्रवाह कम होने के दौरान प्रदूषण तेजी से बढ़ता है, ऐसे में लगातार और समय पर निगरानी बेहद जरूरी है।
DPCC ने जहां मार्च के ड्रेन से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक किए हैं, वहीं सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स से संबंधित डेटा अभी अपलोड नहीं किया गया है, जिससे पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं हो पा रही है।