हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के नेरी क्षेत्र में देश का पहला स्वदेशी बायोचार संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति की समीक्षा की और इसे राज्य के पर्यावरण एवं आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

सरकारी जानकारी के अनुसार, यह बायोचार संयंत्र अगले दस वर्षों में राज्य को लगभग 28,800 कार्बन क्रेडिट अर्जित करने में मदद करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इसके साथ ही वन संसाधनों के सतत और वैज्ञानिक प्रबंधन को भी मजबूती मिलेगी।

इस परियोजना के तहत बायोमास की खरीद 2.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जा रही है। गुणवत्ता बनाए रखने वाले आपूर्तिकर्ताओं को प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। बायोचार का उत्पादन चीड़ की पत्तियों, लैंटाना, बांस और अन्य पौध-आधारित जैव सामग्री से किया जाएगा।

पिछले वर्ष अगस्त में नेरी और जाहू में दो बायोचार संयंत्र स्थापित करने को लेकर समझौता हुआ था। यह समझौता डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी और वन विभाग के बीच किया गया था, जिसमें प्रोक्लाइम सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, चेन्नई भी भागीदार है।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस दौरान “हिम एवरग्रीन इंटीग्रेटेड क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर एंड एग्रो-फॉरेस्ट्री कार्यक्रम” का भी उल्लेख किया। इस योजना के तहत कृषि भूमि पर वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

यह कार्यक्रम लगभग 50,000 हेक्टेयर कृषि भूमि पर लागू किया जाएगा और इसके जरिए करीब 1.35 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को संतुलित करने में योगदान मिलने की संभावना है।

सरकार का कहना है कि इस पहल से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार, जैव विविधता का संरक्षण और जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा मिलेगा।

प्रोक्लाइम के सलाहकार मंडल के सदस्य एरिक सोलहाइम ने हिमाचल सरकार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह परियोजना जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए एक वैज्ञानिक और प्रभावी मॉडल के रूप में उभर सकती है।