गणतंत्र दिवस परेड में हिमाचल प्रदेश की झांकी ने इस बार अपनी अलग पहचान बनाई। रक्षा मंत्रालय द्वारा चुनी गई 17 राज्यों की झांकियों में शामिल हिमाचल की झांकी ने यह संदेश दिया कि यह राज्य न केवल 'देवभूमि' है, बल्कि बहादुरों की भूमि भी है। झांकी ने हिमाचल के वीर बेटे-बेटियों को सलाम करते हुए राज्य की सैन्य परंपरा और देशभक्ति की झलक पेश की।

इस झांकी का थीम था कि हिमाचल प्रदेश, जिसे देवी-देवताओं की भूमि के रूप में जाना जाता है, उतना ही 'वीर भूमि' भी है। राज्य ने अब तक 1,203 वीरता पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया है, जिनमें चार परमवीर चक्र, दो अशोक चक्र और दस महावीर चक्र शामिल हैं। ये संख्या हिमाचल की वीरता और बलिदान की लंबी परंपरा को दर्शाती है।

झांकी में उन हिमाचली जवानों को भी याद किया गया, जिन्होंने कठिन पहाड़ी परिस्थितियों और अदम्य साहस के साथ देश की सेवा में अपना योगदान दिया। यह प्रदर्शन राज्य की संस्कृति और उसकी वीरता का संगम था।

हिमाचल प्रदेश की झांकी ने यह साबित किया कि यह भूमि न केवल पवित्र देवताओं की आशीर्वाद से धन्य है, बल्कि अपने बहादुर नागरिकों के बलिदान और साहस के लिए भी गौरवान्वित है। यह परेड दर्शकों के लिए हिमाचल की 'देवभूमि' और 'वीर भूमि' दोनों की अमिट छवि पेश करने का एक शक्तिशाली अवसर साबित हुई।