जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) ने ईरान में फंसे लगभग 2,000 कश्मीरी छात्रों और अन्य भारतीय नागरिकों की बढ़ती सुरक्षा चिंताओं को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से तुरंत हस्तक्षेप कर सभी भारतीय छात्रों और नागरिकों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने की अपील की है।

जेकेएसए के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने कहा कि तेहरान में स्थिति तेजी से बिगड़ रही है, जिससे छात्रों और उनके परिवारों में भय और अनिश्चितता फैल गई है। “अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद परेशान हैं। अस्थिर माहौल में छात्रों से खुद से निकासी की व्यवस्था करवाना सुरक्षित या व्यावहारिक नहीं है,” उन्होंने बताया।

संगठन ने बताया कि भारतीय दूतावास ने छात्रों को स्व-व्यवस्थित तरीके से देश छोड़ने की सलाह दी है, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक और समन्वित निकासी योजना नहीं बनाई गई है। जेकेएसए ने भारत सरकार से अपील की है कि स्पष्ट निकासी ढांचा, आपातकालीन हेल्पलाइन और सुरक्षित पारगमन मार्ग सुनिश्चित किया जाए, ताकि छात्रों को सम्मानजनक और सुरक्षित रूप से घर लौटने का भरोसा मिले।

महबूबा मुफ्ती ने केंद्र से किया हस्तक्षेप का अनुरोध

पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने गुरुवार को कहा कि ईरान में बढ़ते तनाव के बीच कश्मीरी छात्रों समेत अन्य छात्रों की सुरक्षित वापसी के लिए केंद्र सरकार को त्वरित कदम उठाना चाहिए। यह मांग उन अभिभावकों की चिंता के एक दिन बाद आई, जिन्होंने अपने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार से मदद मांगी थी।

छात्रों और परिवारों में चिंता

अभिभावकों ने बताया कि दूतावास की सलाह ने छात्रों में घबराहट बढ़ा दी है। इंटरनेट और संचार सुविधाओं में बाधा के कारण छात्रों से नियमित संपर्क बनाए रखना मुश्किल हो रहा है।

सैयद मुजामिल कादरी, एक अभिभावक ने कहा, “हम विदेश मंत्री की क्षमता और ईमानदारी पर भरोसा करते हैं, लेकिन अनुरोध है कि हमारे बच्चों को इस कठिन स्थिति में अकेला न छोड़ा जाए और उनकी सुरक्षित निकासी सुनिश्चित की जाए। इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी ने हमारी चिंता और बढ़ा दी है। छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर जोखिम बढ़ सकता है।”

अभिभावकों ने केंद्र से तुरंत कार्रवाई करने, ईरानी अधिकारियों से बातचीत कर छात्रों की सुरक्षित और व्यवस्थित वापसी सुनिश्चित करने, और सभी भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षित निकासी मार्ग स्थापित करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि अधिकांश छात्र ईरान में मेडिकल और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रम कर रहे हैं और आपात स्थिति में भारतीय सरकार पर पूरी तरह निर्भर हैं।