श्रीनगर की स्थानीय अदालत ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और अन्य आरोपियों के खिलाफ कथित जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) घोटाले में आरोप तय करने का आदेश जारी किया है।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तबस्सुम ने पांच पृष्ठों के आदेश में कहा कि मामला 12 मार्च, 2026 को आरोप तय करने के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। इसके बाद मुख्य गवाहों के बयान (अभियोगियों संख्या 3 और 6) साक्ष्य के रूप में दर्ज किए जाएंगे। अदालत ने यह भी कहा कि यदि गवाह अपने बयान से पलटते हैं तो उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अदालत ने एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें इसे मामले में पक्षकार बनाए जाने की मांग की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि मामला सीबीआई द्वारा दर्ज और अभियोजन किया गया है और चार्जशीट में कोई निर्धारित मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध शामिल नहीं है, इसलिए ईडी का इसमें कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

साथ ही अदालत ने कहा कि ईडी की याचिका अस्पष्ट और विरोधाभासी थी। याचिका में भारतीय दंड संहिता की धारा 411 और 414 को जोड़ने की मांग की गई थी, जो 1 जुलाई, 2024 से लागू नहीं हैं। अदालत ने रेखांकित किया कि ईडी का अधिकार केवल मनी लॉन्ड्रिंग जांच तक सीमित है और यह केवल उन्हीं अपराधों के आधार पर कार्रवाई कर सकती है, जिन्हें कानूनी रूप से साबित किया गया हो।

आरोप तय करने के आदेश में अदालत ने कहा कि प्रारंभिक तौर पर रनबीर पेनल कोड (आरपीसी) की धारा 120-B, 406 और 409 के तहत आरोपियों के खिलाफ अपराध के आवश्यक तत्व पाए गए हैं। इसलिए अदालत ने आदेश दिया कि आरोपियों के खिलाफ इन धाराओं के तहत चार्ज लगाए जाएं। साथ ही यह भी कहा गया कि मामले की आगे की सुनवाई में साक्ष्य और गवाहों के बयान के आधार पर अतिरिक्त आरोप भी जोड़े जा सकते हैं।