पहलगाम आतंकी हमले की दर्दनाक घटना के बाद शुरू हुआ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अब एक साल पूरा कर चुका है। यह अभियान सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की सैन्य ताकत, रणनीतिक क्षमता और राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक बनकर उभरा है। उस समय देशभर में गुस्सा और शोक की लहर थी, लेकिन जवाबी कार्रवाई ने यह संदेश साफ कर दिया था कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करता।

इस एक साल में सीमा पर हालात बदले हैं। जम्मू के आरएस पुरा सेक्टर के गांव अब्दुलियां में आज भी जीवन सामान्य दिखता है। लोग अपने कामों में व्यस्त हैं, खेतों में हलचल लौट आई है और बाजारों में चहल-पहल दिखाई देती है। लेकिन सामान्य दिखने वाली इस जिंदगी के पीछे सतर्कता की एक परत भी मौजूद है, जो समय-समय पर लोगों को हालात की याद दिलाती रहती है।

गांव के लोग बताते हैं कि बॉर्डर के पास होने के कारण सुरक्षा तैयारियां लगातार बनी रहती हैं। गांव में मौजूद बंकरों और सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर लोग कहते हैं कि स्थिति सामान्य जरूर है, लेकिन किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी हमेशा जरूरी है।

पूर्व सैनिकों और स्थानीय लोगों की राय में सेना पर भरोसा मजबूत है। लोग मानते हैं कि किसी भी चुनौती का जवाब देने में भारतीय सेना पूरी तरह सक्षम है, इसलिए सीमावर्ती इलाकों में जीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौट आया है।

सीमा के पास लौटती सामान्य जिंदगी

आरएस पुरा से लेकर सांबा सेक्टर तक सीमावर्ती गांवों में खेतों में काम शुरू हो चुका है। कई जगहों पर ड्रोन हमलों और गोलाबारी के निशान अब भी मौजूद हैं, लेकिन लोगों ने जिंदगी को फिर से आगे बढ़ाना सीख लिया है।

70 वर्षीय ग्रामीण बताते हैं कि तनाव भले कम हुआ हो, लेकिन सुरक्षा को लेकर सतर्कता अब भी बनी हुई है। रात के समय अचानक कोई आवाज सुनाई दे तो लोग आज भी चौकन्ने हो जाते हैं।

महिलाएं और स्थानीय निवासी कहते हैं कि हालात पहले से बेहतर हैं, लेकिन मानसिक तौर पर वह समय आज भी यादों में ताजा है।

रिहाड़ी और रूपनगर में अब भी मौजूद निशान

जम्मू शहर के रिहाड़ी कॉलोनी और रूपनगर इलाके में बीते हमलों की यादें आज भी दीवारों पर दिखती हैं। कहीं टूटे शीशे, तो कहीं मरम्मत के निशान यह बताते हैं कि उस रात की घटना कितनी भयावह थी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि घर तो दोबारा बन गए, लेकिन उस दिन का डर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि देश और सेना पर भरोसा पहले से अधिक मजबूत हुआ है।

सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सुरक्षा तंत्र को और मजबूत किया गया है। रेलवे नेटवर्क और त्वरित मूवमेंट सिस्टम से सेना की तैनाती पहले से तेज हुई है। साथ ही खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय भी बढ़ाया गया है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस अब एआई आधारित सुरक्षा सिस्टम पर काम कर रही है, जिससे निगरानी और खतरे की पहचान पहले से अधिक सटीक हो सके।

इसके अलावा जंगल और दुर्गम इलाकों में विशेष प्रशिक्षण देकर जवानों की क्षमता बढ़ाई जा रही है, ताकि किसी भी तरह की घुसपैठ या आतंकी गतिविधि का तुरंत जवाब दिया जा सके।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अब सीमा पार से सीधे युद्ध की बजाय छिपे हुए नेटवर्क और आतंकी सहयोगियों के जरिए चुनौती देने की कोशिशें होती हैं, लेकिन मजबूत सुरक्षा ढांचे के कारण इन्हें लगातार विफल किया जा रहा है।