पहलगाम की बायसरन घाटी में हुए आतंकी हमले ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा रणनीति में बड़े बदलाव की शुरुआत कर दी। इस घटना के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई के रूप में Operation Sindoor के जरिए पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया, जबकि घाटी में सुरक्षा ढांचे को पूरी तरह नए सिरे से तैयार किया गया।
हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को पारंपरिक मॉडल से हटाकर आधुनिक तकनीक आधारित मल्टी-लेयर सिस्टम में बदला जा रहा है। अब यहां निगरानी, पहचान और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को पहले से कहीं अधिक मजबूत किया गया है।
सुरक्षा में तकनीक बनी मुख्य आधार
घाटी में फेस रिकग्निशन सिस्टम, स्मार्ट फेंसिंग, एंटी-ड्रोन तकनीक, क्यूआर कोड आधारित वेरिफिकेशन और डिजिटल निगरानी व्यवस्था को तेजी से लागू किया गया है। पर्यटन स्थलों पर घोड़ा चालकों, गाइड और अन्य सेवा प्रदाताओं के लिए क्यूआर कोड पहचान अनिवार्य कर दी गई है। इससे पर्यटक स्कैन करके व्यक्ति की पहचान और पुलिस सत्यापन तुरंत देख सकते हैं।
पर्यटन क्षेत्रों में बढ़ी निगरानी
पहलगाम सहित पूरे क्षेत्र में पर्यटन स्थलों की दोबारा सुरक्षा समीक्षा की गई है। संवेदनशील और खाली पड़े इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 43 नए अस्थायी ऑपरेटिंग बेस बनाए गए हैं, जिससे किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।
सेना जैसी ट्रेनिंग अब पुलिस को
Jammu and Kashmir पुलिस को अब सेना की तर्ज पर विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें जंगल वारफेयर, गुरिल्ला युद्ध और माउंटेन ऑपरेशन जैसी ट्रेनिंग शामिल है। साथ ही पुलिस बल को बुलेटप्रूफ वाहन और बम निरोधक उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं। इसी आधुनिक प्रशिक्षण के चलते हाल ही में एक बड़े व्हाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल का खुलासा किया गया।
सीमा पर स्मार्ट निगरानी सिस्टम
नियंत्रण रेखा (LOC) पर सेंसर आधारित “स्मार्ट फेंस” को और विस्तार दिया गया है, जो किसी भी घुसपैठ की कोशिश पर तुरंत अलर्ट जारी करता है। संवेदनशील क्षेत्रों जैसे अखनूर में एंटी-ड्रोन सिस्टम और 24 घंटे हवाई निगरानी को मजबूत किया गया है।
इसके अलावा थर्मल इमेजिंग, रडार और नाइट विजन तकनीक की मदद से सुरक्षा बल अब रात के समय भी पूरी सतर्कता के साथ सीमा पर नजर रख रहे हैं। इन तकनीकी सुधारों ने कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत और आधुनिक बना दिया है।