पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने रविवार को भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की वकालत करते हुए बड़ा बयान दिया। पुंछ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि दोनों देशों के बीच पिछले तीन महीनों से अनौपचारिक बातचीत चल रही है। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे का समाधान केवल संवाद के जरिए ही संभव है।
“बातचीत ही एकमात्र रास्ता”
महबूबा मुफ्ती ने अपने संबोधन में कहा कि कई पूर्व राजनयिक और सैन्य अधिकारी विदेशों में पाकिस्तान के लोगों के साथ चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने अपने दिवंगत पिता और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की नीतियों का जिक्र करते हुए कहा कि उनका बनाया हुआ “रोडमैप” ही क्षेत्र में शांति की दिशा में सबसे व्यावहारिक रास्ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान बातचीत के बिना संभव नहीं है और अंततः सभी पक्षों को वार्ता की मेज पर आना ही होगा।
सीमा पार पहल और पुराने प्रयासों का जिक्र
पीडीपी प्रमुख ने अपने कार्यकाल के दौरान शुरू की गई नियंत्रण रेखा पार व्यापार और यात्रा व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रावलकोट मार्ग खोलने का उद्देश्य आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और तनाव कम करना था, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
संवैधानिक बदलावों पर टिप्पणी
महबूबा मुफ्ती ने 2019 में हुए संवैधानिक बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर पीर पंजाल और चिनाब घाटी के लोगों पर पड़ा है। उन्होंने केंद्र सरकार पर पुंछ के मेंढर क्षेत्र के लिए अलग प्रशासनिक इकाई और पहाड़ी दर्जे की मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय विकास के लिए अलग संभागीय व्यवस्था की मांग लंबे समय से की जा रही है, ताकि लोगों को छोटे-छोटे प्रशासनिक कामों के लिए दूर न जाना पड़े।
बेरोजगारी और सामाजिक मुद्दों पर चिंता
अपने संबोधन में महबूबा मुफ्ती ने क्षेत्र में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक असमानता पर भी चिंता जताई। उन्होंने विशेष रूप से गुर्जर और बकरवाल समुदायों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि चरागाह भूमि पर रहने वाले गरीब परिवारों को गलत तरीके से प्रभावित किया जा रहा है।
युवाओं से अपील
उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पंचायत चुनावों में भागीदारी से ही क्षेत्र के विकास और भविष्य की दिशा तय हो सकती है।