झारखंड के गुमला जिले के सिसई प्रखंड की भुरसो पंचायत में चल रही लघु सिंचाई योजना के तहत सार्वजनिक तालाब के सुंदरीकरण कार्य को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी की जा रही है, जिससे तालाब की संरचना, आस-पास के घर और सिसई–लोहरदगा मुख्य मार्ग की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसके लिए उन्होंने जिला प्रशासन को लिखित आवेदन देकर निष्पक्ष जांच और सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की है।

तालाब से सिंचाई होती है 5,000 एकड़ भूमि की

ग्रामीणों के अनुसार यह तालाब भुरसो और आसपास के टोला-मुहल्लों के लिए जीवनरेखा का काम करता है। पूजा-पाठ, पशुपालन और खेतों की सिंचाई के लिए लोग इसी तालाब पर निर्भर हैं। ग्राम प्रधान दिनेश उरांव और अन्य ग्रामीणों का दावा है कि लगभग 5,000 एकड़ भूमि की सिंचाई इस तालाब के पानी से होती है।

निर्माण में मानक नहीं रखे जा रहे

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान कहीं अत्यधिक खुदाई की गई है, तो कहीं मिट्टी के बड़े ढेर छोड़ दिए गए हैं। संकरी जगह पर गार्डवाल निर्माण से मानसून में पानी का तेज बहाव बढ़ सकता है, जिससे आस-पास के घर और मुख्य सड़क को नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, तालाब से निकाली गई मिट्टी को साप्ताहिक हाट, खेल मैदान और सरना स्थल के पास डंप करने से ग्रामीण परेशान हैं।

ठेकेदार पर मनमानी करने का आरोप

ग्रामीणों ने बताया कि समतलीकरण की मांग करने पर ठेकेदार ने इनकार किया और आपत्ति जताने पर दुर्व्यवहार और धमकी देने का आरोप भी लगाया गया। इस मुद्दे पर ग्रामसभा बुलाई गई थी, जिसमें ठेकेदार को आमंत्रित किया गया, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्य में सुधार और जांच नहीं हुई, तो वे प्रखंड मुख्यालय का घेराव और मुख्य मार्ग पर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।