रांची: झारखंड के चाईबासा और हजारीबाग में लोगों के लिए हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। इसे रोकने के लिए कर्नाटक से छह विशेष प्रशिक्षित कुनकी हाथी राज्य में भेजे जा रहे हैं।

कुनकी हाथियों की भूमिका

ये हाथी विशेष प्रशिक्षण प्राप्त हैं और इनका काम हिंसक या बेलगाम हाथियों को अपने प्रेमजाल और शांतिपूर्ण व्यवहार से नियंत्रित करना है। प्रशिक्षित कुशल हाथी और महावत (हाथी प्रशिक्षक) मिलकर हिंसक हाथियों को जंगल की ओर वापस ले जाएंगे।

कुनकी या कुमकी शब्द फारसी भाषा से लिया गया है, जिसका मतलब होता है ‘सहायक’। तमिलनाडू और कर्नाटक में जैसे कालेम और अभिमन्यु नामक कुनकी हाथी कई सफल अभियानों में मदद कर चुके हैं। इनकी उपस्थिति, शरीर से निकलने वाली गंध और हाथियों के आपसी व्यवहार का उपयोग कर बेलगाम हाथियों को नियंत्रित किया जाता है।

झारखंड में हाथियों का बढ़ता आतंक

राज्य में लगभग 600 हाथी हैं, जो जंगलों में विचरण करते हैं। हालाँकि, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार जंगल क्षेत्र कम होने के कारण हाथियों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल रहा है। एक सामान्य हाथी को दिन में लगभग 17 घंटे भोजन की जरूरत होती है।

भोजन की कमी और जंगलों के सिकुड़ने के कारण हाथी अक्सर मानव बस्तियों और खेतों में प्रवेश कर रहे हैं। तैयार फसल और केले जैसे फल इनके लिए आसान भोजन बन गए हैं। इससे उनका भोजन पूरा होता है, लेकिन क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। किसी नर हाथी को झुंड से अलग होना पड़ता है और वह हिंसक हो जाता है।

पिछले हादसों का विवरण

पिछले महीने झारखंड में बौराए हाथियों के कारण 25 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। चाईबासा में अकेले एक हाथी ने 15 से ज्यादा लोगों को मार डाला। हजारीबाग में पांच हाथियों के झुंड ने एक ही रात में सात लोगों की जान ले ली।

कुनकी हाथियों की तैनाती से अधिकारियों को उम्मीद है कि ये हिंसक हाथियों को नियंत्रित करके लोगों की जान और फसलों की रक्षा करेंगे।