भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से जुड़े एक अहम मामले में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। नामांकन पत्र खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है।
कांग्रेस ने चुनाव अधिकारी (RO) के उस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किया गया था। हालांकि शीर्ष अदालत ने मामले पर विचार करने से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने याचिका पर विचार से किया इनकार
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि वह इस याचिका पर विचार नहीं करना चाहता और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि संबंधित मामले में अभी आरोप तय नहीं हुए हैं, जबकि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत नामांकन रद्द करने के लिए आरोप तय होना एक आवश्यक शर्त होती है।
सुप्रीम कोर्ट की सवाल-जवाब प्रक्रिया
कोर्ट ने इस पर सवाल उठाते हुए वकील से पूछा कि क्या ऐसा कोई उदाहरण है, जिसमें नामांकन प्रक्रिया के बाद रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया हो।
इस पर सिंघवी ने कहा कि यदि मामले के तथ्य स्पष्ट होते हैं तो अदालत कानून के अनुसार निर्णय लेती है।
याचिका पर आपत्ति भी जताई गई
दूसरी ओर, भाजपा उम्मीदवार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि नामांकन रद्द होने से किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं होता, इसलिए अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल नहीं की जा सकती।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान अनुच्छेद 329 के तहत न्यायिक हस्तक्षेप पर रोक रहती है और ऐसे मामलों में राहत का रास्ता चुनावी ट्रिब्यूनल के माध्यम से होता है।
सुनवाई के दौरान तकनीकी बाधा
सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में आई तकनीकी खराबी के कारण अधिवक्ता मुकुल रोहतगी की दलीलें बीच में ही बाधित हो गईं। इसके बावजूद कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।