भारत की सबसे संपन्न नगर निकाय मानी जाने वाली बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) एक बार फिर चर्चा में है। 15 जनवरी को होने वाले बीएमसी चुनावों से पहले इसका विशाल बजट सुर्खियों में है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बीएमसी का बजट ₹74 हजार करोड़ से अधिक पहुंच चुका है, जो न केवल इसे देश की सबसे अमीर नगर पालिका बनाता है, बल्कि कई भारतीय राज्यों के कुल बजट से भी बड़ा है। यह आंकड़ा मुंबई जैसे महानगर के प्रशासन, बुनियादी ढांचे और नागरिक सेवाओं में बीएमसी की अहम भूमिका को दर्शाता है।

कई राज्यों से भी बड़ा बीएमसी का बजट

4 फरवरी 2025 को पेश किया गया बीएमसी का ₹74,427 करोड़ का बजट अब तक का सबसे बड़ा माना जा रहा है। यह पिछले वर्ष की तुलना में करीब 14 प्रतिशत अधिक है। हैरानी की बात यह है कि एक नगर निगम होते हुए भी बीएमसी का बजट गोवा, त्रिपुरा और सिक्किम जैसे पूर्ण राज्यों के बजट से कहीं आगे निकल चुका है। यहां तक कि हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य भी कुल खर्च के मामले में बीएमसी से पीछे हैं।

अन्य बड़े महानगरों से तुलना करें तो अंतर और भी साफ दिखता है। दिल्ली नगर निगम का प्रस्तावित बजट करीब ₹16,530 करोड़ है, जबकि बेंगलुरु महानगर पालिका का बजट लगभग ₹19,930 करोड़ के आसपास है। वहीं रांची नगर निगम का कुल बजट बीएमसी के बजट का एक प्रतिशत भी नहीं बैठता।

कहां से आती है बीएमसी की कमाई?

बीएमसी की आर्थिक मजबूती की सबसे बड़ी वजह उसकी नियमित और मजबूत आय है। इसमें टैक्स, शुल्क, विकास शुल्क और निवेश से होने वाली आमदनी शामिल है।

  • संपत्ति कर बीएमसी की आय का प्रमुख स्रोत है। वर्ष 2025-26 में इससे करीब ₹5,200 करोड़ जुटने का अनुमान है।

  • कुल राजस्व आय इसी वित्तीय वर्ष में लगभग ₹43,159 करोड़ रहने का अनुमान लगाया गया है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक है।

बजट का बड़ा हिस्सा विकास कार्यों पर

बीएमसी का अधिकतर बजट शहर के विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर खर्च किया जाता है। कुल बजट का लगभग 58 प्रतिशत यानी ₹43,000 करोड़ से ज्यादा पूंजीगत व्यय के लिए रखा गया है।

  • सड़क, पुल और स्वास्थ्य सेवाएं: सड़कों, फ्लाईओवर, सीवेज सिस्टम और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर बड़े स्तर पर निवेश किया जा रहा है। बजट का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तय किया गया है।

  • शिक्षा और परिवहन: शिक्षा के साथ-साथ बीएमसी की परिवहन इकाई ‘बेस्ट’ को ₹1,000 करोड़ की सहायता देने का प्रस्ताव है। इसके अलावा 15वें वित्त आयोग के तहत इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए ₹992 करोड़ की मंजूरी दी गई है।

2022 के बाद प्रशासक के अधीन चल रही बीएमसी

बीएमसी के निर्वाचित पार्षदों का कार्यकाल मार्च 2022 में समाप्त हो गया था। तब से नगर निगम प्रशासक के माध्यम से संचालित हो रही है। अब 15 जनवरी 2026 को होने वाले चुनावों के साथ एक बार फिर निर्वाचित निकाय के गठन का रास्ता साफ होगा। 227 वार्डों में नियंत्रण हासिल करने के लिए करीब 1,700 उम्मीदवार मैदान में उतर चुके हैं।

कुल मिलाकर, बीएमसी का बजट सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मुंबई जैसी वैश्विक महानगरीय शहर की जरूरतों, विकास योजनाओं और प्रशासनिक क्षमता को भी दर्शाता है। खास तौर पर बुनियादी ढांचे पर भारी निवेश यह संकेत देता है कि आने वाले कार्यकाल में विकास प्राथमिक एजेंडे में रहेगा।