मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में अहम घटनाक्रम के तहत राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने दोषसिद्ध एनसीपी नेता माणिकराव कोकाटे के पास रहे विभागों का दायित्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार को सौंप दिया है। कोकाटे को 1995 के एक धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में नासिक की अदालत ने दो वर्ष की सजा सुनाई है। वह एनसीपी के वरिष्ठ नेता हैं और हाल तक राज्य के खेल मंत्री के रूप में कार्यरत थे।

फर्जी दस्तावेजों से फ्लैट आवंटन का मामला
नासिक सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के 20 फरवरी के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि कोकाटे ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित फ्लैट हासिल करने के उद्देश्य से जाली दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। अदालत के अनुसार, कोकाटे स्वयं संपन्न किसान हैं और इसके बावजूद उन्होंने सरकारी व्यवस्था को गुमराह किया। इस मामले में बुधवार को उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी कर दिया गया, जिससे उनके मंत्री पद पर बने रहने को लेकर सवाल और गहरे हो गए। बढ़ते दबाव के बीच कोकाटे को इलाज के लिए लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

हाईकोर्ट में दी सजा को चुनौती
माणिकराव कोकाटे ने सत्र न्यायालय के फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनके वकील अनिकेत निकम ने न्यायमूर्ति आर.एन. लड्ढा की एकल पीठ के समक्ष याचिका दायर करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की, जिस पर अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई तय की है। गौरतलब है कि इस मामले की शुरुआत 1997 में पूर्व मंत्री तुकाराम दिघोले द्वारा दायर याचिका से हुई थी।

विधायकी पर भी संकट
दोषसिद्धि के बाद कोकाटे की विधानसभा सदस्यता पर भी खतरा मंडराने लगा है। इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा कि फिलहाल उन्हें अदालत के आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त नहीं हुई है। वहीं, एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि पार्टी अदालत के अंतिम फैसले के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी।