अमृतसर। खालसा साजना दिवस और बैसाखी के पावन अवसर पर अमृतसर से सिख श्रद्धालुओं का एक विशाल जत्था पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुधामों के दर्शन के लिए रवाना हुआ। इस धार्मिक यात्रा में कुल 1763 श्रद्धालु शामिल हैं, जो अटारी सीमा के माध्यम से पाकिस्तान में प्रवेश करेंगे।
रवानगी से पहले श्री हरिमंदिर साहिब परिसर में श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्साह का माहौल देखने को मिला। वातावरण लगातार ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के जयकारों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था, उत्साह और पवित्र यात्रा को लेकर गहरी श्रद्धा स्पष्ट नजर आ रही थी।
जानकारी के अनुसार, सभी श्रद्धालुओं को एक दिन पहले ही शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) कार्यालय से आवश्यक पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेज सौंप दिए गए थे। हालांकि इस बीच 32 श्रद्धालुओं के वीजा रद्द होने की सूचना भी सामने आई, जिससे कुछ लोगों में निराशा देखने को मिली।
श्री पंजा साहिब की ओर जत्था
यह जत्था आज पाकिस्तान के हसन अब्दाल स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब पहुंचेगा, जहां बैसाखी का मुख्य धार्मिक समागम आयोजित किया जाएगा। सिख इतिहास में इस पवित्र स्थल का विशेष महत्व है और यहां मत्था टेकना श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत सौभाग्यपूर्ण माना जाता है।
इसके अलावा श्रद्धालु पाकिस्तान स्थित अन्य प्रमुख ऐतिहासिक गुरुद्वारों के भी दर्शन करेंगे, जहां सिख गुरुओं से जुड़ी महत्वपूर्ण धार्मिक स्मृतियां आज भी संरक्षित हैं। यात्रा के दौरान कीर्तन, अरदास और धार्मिक कार्यक्रमों में भी श्रद्धालु भाग लेंगे।
19 अप्रैल को वापसी
पाकिस्तान सरकार द्वारा इस वर्ष कुल 1763 श्रद्धालुओं को वीजा प्रदान किया गया है। यह धार्मिक यात्रा भारत और पाकिस्तान के बीच सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करने का भी माध्यम मानी जाती है।
अपनी आध्यात्मिक यात्रा पूरी करने के बाद यह जत्था 19 अप्रैल को भारत वापस लौटेगा। श्रद्धालुओं में इस यात्रा को लेकर विशेष उत्साह है और वे इसे अपने जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव बता रहे हैं।