मकर संक्रांति के पावन अवसर पर गुरुवार को संगम तट पर श्रद्धालुओं और कल्पवासियों की भारी भीड़ उमड़ी। मेला प्रशासन के अनुसार, इस दिन दो से ढाई करोड़ श्रद्धालुओं के पवित्र स्नान करने की संभावना जताई गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुल 24 स्नान घाटों पर विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। साथ ही, आधुनिक ट्रैफिक कंट्रोल रूम के माध्यम से हाईटेक रिस्पांस प्लान लागू किया गया है।

नदियों के जलप्रवाह में आए बदलाव को देखते हुए कुछ घाटों और संपर्क मार्गों में आंशिक परिवर्तन भी किए गए हैं। स्नान घाटों और मार्गों पर भीड़ नियंत्रण को लेकर सख्त निर्देश दिए गए हैं। किसी को भी रास्तों या घाटों पर रुकने या सोने की अनुमति नहीं दी जा रही है, ताकि अव्यवस्था या घबराहट की स्थिति उत्पन्न न हो। सभी सुरक्षा कर्मियों को वायरलेस संचार का अनिवार्य रूप से उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले बुधवार को ही 75 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई थी।

श्रद्धालु सिर पर गठरी, हाथों में झोले और बैग लिए पैदल ही संगम की ओर बढ़ते नजर आए। मेला क्षेत्र संतों, साधु-संन्यासियों और कल्पवासियों के विशाल समागम का साक्षी बन रहा है। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के अनुसार घाटों और रास्तों पर त्वरित और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी मनीष वर्मा ने बताया कि जल पुलिस को पूरी सतर्कता के साथ तैनात रहने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं एसपी नीरज कुमार पांडेय ने कहा कि श्रद्धालुओं को जिस दिशा से मेला क्षेत्र में प्रवेश मिले, उसी के नजदीकी घाट पर स्नान कराया जा रहा है, ताकि अनावश्यक भीड़ और जाम से बचा जा सके।

जाम की आशंका वाले आठ स्थान चिन्हित

मेला क्षेत्र में जाम की संभावनाओं को देखते हुए संवेदनशील चौराहों के बीच आठ प्रमुख स्थान चिन्हित किए गए हैं। इन स्थानों को सुचारू रखने के लिए क्विक रिस्पांस टीम (QRT) गठित की गई है, जो ट्रैफिक कंट्रोल रूम से सूचना मिलते ही मौके पर पहुंच सकेगी। प्रत्येक क्यूआरटी में छह पुलिसकर्मी और एक विशेष वाहन तैनात है। ट्रैफिक कंट्रोल रूम की निगरानी सीओ स्तर के अधिकारी करेंगे। जाम की स्थिति में एसीपी, एसएचओ और एसआई को जिम्मेदार ठहराया गया है।

सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद

पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार के अनुसार, श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए स्नान घाटों से लेकर पूरे मेला परिसर तक व्यापक इंतजाम किए गए हैं। 12 कंपनी पीएसी, बाढ़ राहत पीएसी की सात कंपनियां, एनडीआरएफ की दो टीमें, एसडीआरएफ, एंटी माइंस, एटीएस की दो टीमें, बीडीडीएस की छह और एएस चेक की दस टीमें तैनात की गई हैं। इसके अलावा आरएएफ की छह कंपनियां और यूपी-112 की 20 चारपहिया व 25 दोपहिया गाड़ियां लगातार निगरानी कर रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था में एक एसपी, आठ एएसपी, 17 सीओ, 6,169 दरोगा व सिपाही सहित एक हजार नव-भर्ती आरक्षी लगाए गए हैं।