जालौन जिले के मुहम्मदाबाद क्षेत्र से एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां मोबाइल फोन को लेकर पारिवारिक असहमति के बाद 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा ने आत्मघाती कदम उठा लिया। ज़हर खाने के बाद परिजन उसे तत्काल इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, लेकिन हालत गंभीर होने पर झांसी रेफर की गई छात्रा की रास्ते में ही मौत हो गई।
डकोर थाना क्षेत्र के कुसमिलिया गांव निवासी तुलसीराम राजपूत खेती के साथ-साथ ऑटो चलाकर परिवार का खर्च चलाते हैं। परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा और दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी का विवाह हो चुका है, जबकि छोटी बेटी माया (17) गांव के राजकीय इंटर कॉलेज में कक्षा 11 की छात्रा थी। बेटा मानवेंद्र भी पढ़ाई कर रहा है।
परिजनों के अनुसार कुछ समय पहले माया का मोबाइल फोन खराब हो गया था। इसके बाद वह नया फोन दिलाने की बात कहने लगी। उसकी मांग एक पुराने आईफोन को लेकर थी, जिसकी कीमत करीब 40 हजार रुपये बताई जा रही थी। सीमित आर्थिक स्थिति के चलते पिता उसकी इच्छा तुरंत पूरी नहीं कर सके।
तुलसीराम ने बेटी को भरोसा दिलाया था कि 15 दिन बाद मटर की फसल बिकने पर वह उसे मोबाइल दिला देंगे, लेकिन माया लगातार अपनी मांग पर अड़ी रही। पिता ने बताया कि बेटी का स्वभाव जिद्दी था। इससे पहले वह घड़ी और फिर सोने की झुमकी की मांग कर चुकी थी, लेकिन बाद में उसने महंगे फोन पर ही ज़ोर देना शुरू कर दिया।
घटना वाले दिन पिता ऑटो चलाने गए थे और मां खेत पर काम करने गई थीं। घर पर अकेली माया ने इसी दौरान चूहा मारने की दवा खा ली। कुछ समय बाद उसने अपने भाई को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद परिवार में अफरा-तफरी मच गई। परिजन तुरंत उसे उरई मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां से डॉक्टरों ने उसे झांसी रेफर कर दिया।
हालांकि झांसी पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। पिता तुलसीराम का कहना है कि उन्हें इस बात का गहरा अफसोस है कि वे बेटी की मानसिक स्थिति को समय रहते समझ नहीं पाए। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें जरा भी अंदेशा होता कि बेटी इतना बड़ा कदम उठा लेगी, तो वे किसी भी तरह उसकी मांग पूरी कर देते।
डकोर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विजय पांडेय ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। परिजनों से पूछताछ कर यह पता लगाया जा रहा है कि किन परिस्थितियों में छात्रा ने यह कदम उठाया।