बांदा। कुख्यात स्क्रैप माफिया और गैंगस्टर रविंद्र सिंह उर्फ रवि काना की विवादित रिहाई को लेकर बड़ा एक्शन हुआ है। जेल चौकी प्रभारी की शिकायत पर कोतवाली नगर थाने में जेल अधीक्षक, जेलर और अन्य अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 260-सी के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि लोक सेवकों ने जानबूझकर आरोपी को हिरासत में रखने में लापरवाही बरती।

इस पूरे मामले की जांच के लिए पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने अपर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम गठित की है। टीम ने मंगलवार को मंडल कारागार पहुंचकर करीब छह घंटे तक जेल से जुड़े दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज और रिहाई से संबंधित रिकॉर्ड की गहन जांच की।

वीडियो पेशी के बाद हुई रिहाई

रवि काना पर नोएडा के सेक्टर-63 थाने में वसूली सहित कई गंभीर मामले दर्ज हैं। वह वर्ष 2024 से बांदा मंडल कारागार में अन्य मामलों में बंद था। एक मामले में बी-वारंट के जरिए उसे अदालत में पेश किया जाना था। 29 जनवरी को उसकी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेशी कराई गई और उसी दिन शाम को उसे जेल से बाहर कर दिया गया।

इस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गौतमबुद्धनगर ने डीजी जेल और जेल अधीक्षक से जवाब मांगा था। इसके बाद डीजी जेल पीसी मीणा ने प्रयागराज रेंज के डीआईजी जेल राजेश श्रीवास्तव को जांच सौंपी। शुरुआती कार्रवाई में जेलर विक्रम सिंह यादव को निलंबित कर दिया गया।

उच्च अधिकारियों के निर्देश पर जेल चौकी प्रभारी अनुराग पांडेय ने जेल अधीक्षक अनिल गौतम, निलंबित जेलर विक्रम सिंह यादव और अन्य अज्ञात कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। बीएनएस की धारा 260-सी के तहत किसी लोक सेवक द्वारा जानबूझकर गिरफ्तारी में चूक करना अपराध की श्रेणी में आता है।

जेल में छह घंटे चली पूछताछ

एफआईआर के बाद गठित जांच टीम में सीओ सिटी, शहर कोतवाल और एसओजी प्रभारी को भी शामिल किया गया है। टीम ने जेल में जाकर सीसीटीवी फुटेज, कैमरों की स्थिति और रिहाई की पूरी प्रक्रिया का परीक्षण किया। इस दौरान जेल अधीक्षक समेत 10 जेल कर्मचारियों और नौ बंदियों से पूछताछ की गई। जेल अधीक्षक से अलग कमरे में विस्तार से सवाल-जवाब किए गए।

नया जेलर नियुक्त

जेलर के निलंबन के एक सप्ताह के भीतर प्रयागराज जोन से आलोक कुमार को नया जेलर बनाकर जिला कारागार में तैनात किया गया है।

एसपी पलाश बंसल ने कहा कि जेल चौकी प्रभारी की शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया गया है और एएसपी के नेतृत्व में गठित विशेष टीम हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है कि आखिर किन हालात में गैंगस्टर को जेल से बाहर किया गया।