मुजफ्फरनगर: प्राथमिक विद्यालय नंबर-एक, किनौनी में तैनात शिक्षामित्र एवं बीएलओ अनुजवीर द्वारा जहरीला पदार्थ सेवन करने के मामले में मंगलवार को बड़ा मोड़ आ गया। परिजनों ने गांव की प्रधान के पति देवेंद्र कुमार, सुपरवाइजर पंकज कुमार और पंचायत सहायक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इन्हीं लोगों के दबाव और प्रताड़ना के कारण अनुजवीर ने यह कदम उठाया।

बीएलओ अनुजवीर इस समय मेरठ मेडिकल कॉलेज में इलाजरत हैं। मंगलवार को बीएसए संदीप चौहान ने अस्पताल पहुंचकर उनका हाल जाना। इस दौरान अनुजवीर की पत्नी किरण और भाभी बेबी ने मीडिया को बताया कि तीनों आरोपित लगातार उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर रहे थे।

परिजनों का कहना है कि गांव में वोट बनवाने को लेकर कुछ कागजात को लेकर विवाद चल रहा था। कुख्यात विनोद बावला की पत्नी का नाम इस प्रक्रिया में सामने आया था। हालांकि परिवार का कहना है कि विनोद ने सीधे तौर पर कोई दबाव नहीं बनाया, लेकिन कुछ लोग उसके नाम का सहारा लेकर उन्हें डराते रहे। आरोप है कि इन लोगों ने घर से जरूरी कागजात उठा लिए और कुछ फार्म भी खराब कर दिए।

दूसरी ओर, सुपरवाइजर पंकज कुमार का कहना है कि अनुजवीर ने गांव के एक व्यक्ति विनोद की पत्नी का वोट बनवाने के बारे में बताया था। आवश्यक दस्तावेज लाकर वोट बनवाने की बात कही गई थी। पंकज का दावा है कि वह विनोद को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते।

बीएसए संदीप चौहान ने स्पष्ट किया कि एसआईआर कार्य को लेकर किसी तरह का दबाव नहीं डाला गया था। प्रारंभिक तौर पर गांव के अंदरूनी विवाद की बात सामने आ रही है। वहीं एसएसपी संजय कुमार ने कहा कि अभी तक कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन मामले की जांच कराई जाएगी।

घटना कैसे हुई

किनौनी गांव निवासी अनुजवीर वर्ष 2003 से प्राथमिक विद्यालय नंबर-एक में शिक्षामित्र के रूप में कार्यरत हैं और एसआईआर के तहत उन्हें बीएलओ की जिम्मेदारी दी गई थी। सोमवार दोपहर करीब एक बजे उन्होंने स्कूल का कमरा बंद कर जहरीला पदार्थ खा लिया। स्कूल की प्रधानाचार्या अंजू ने इसकी जानकारी परिजनों को दी, जिसके बाद उन्हें मेरठ मेडिकल में भर्ती कराया गया।

अनुजवीर की जेब से मिले एक पत्र में प्रधान के पति देवेंद्र कुमार, सुपरवाइजर पंकज कुमार और पंचायत सहायिका पर उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है।

आरोपों से इनकार

गांव की प्रधान सुमन के पति देवेंद्र सिंह ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वह सिर्फ बीएलओ से मिलने अस्पताल गए थे और परिवार से भी बातचीत कर लौटे हैं।

सुपरवाइजर पंकज कुमार ने भी कहा कि अनुजवीर को तकनीकी काम में परेशानी हो रही थी, इसलिए उन्होंने और पंचायत सहायक ने मिलकर उनका काम पूरा कराया। किसी तरह का दबाव नहीं बनाया गया।

विनोद बावला का नाम फिर चर्चा में

करीब डेढ़ साल पहले दो भाइयों पर गोली चलाने के मामले में कुख्यात विनोद बावला को सबूतों के अभाव में बरी किया गया था। अब वोट से जुड़े इस विवाद में उसका नाम फिर सामने आ गया है, हालांकि परिजन साफ कहते हैं कि विनोद ने उन्हें सीधे तौर पर कोई धमकी नहीं दी।

अनुजवीर की भाभी बेबी ने बताया कि विनोद ने तो डॉक्टर को फोन कर मदद भी की थी, असली परेशानी प्रधान के पति और उनके साथियों की वजह से हुई।