लखनऊ: आने वाले मानसून में संभावित बाढ़ और अत्यधिक बारिश से निपटने की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को अलर्ट मोड में रहने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि बाढ़ सुरक्षा से जुड़े कार्यों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
मुख्यमंत्री ने संवेदनशील तटबंधों की मजबूती, ड्रेनों की मरम्मत और जल निकासी से जुड़े सभी कार्य तय समय के भीतर पूरे कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि बाढ़ के दौरान किसी तरह की बड़ी परेशानी न खड़ी हो।
मंगलवार को अपने सरकारी आवास पर आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश की बाढ़-पूर्व तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने आपसी समन्वय, सतर्क निगरानी और समयबद्ध कार्यवाही पर खास जोर दिया।
बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई ने जानकारी दी कि गंगा, सरयू (घाघरा), राप्ती, रामगंगा, गंडक, यमुना, गोमती और सोन नदी के बेसिन से जुड़े करीब 23 जिले बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील हैं। इनमें से 11 जिलों के 19 तटबंधों को अत्यंत संवेदनशील और 12 जिलों के 18 तटबंधों को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इन सभी तटबंधों की कुल लंबाई लगभग 706 किलोमीटर से अधिक है।
मुख्यमंत्री ने इन सभी तटबंधों की नियमित निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तटबंधों और बैराजों पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू की जाए। इसके लिए ड्रोन सर्वे, जलस्तर मापने वाले सेंसर और जिला प्रशासन के साथ बेहतर तालमेल बनाने पर भी जोर दिया गया।
इसके अलावा नदियों की मुख्य धारा में आवश्यकता के अनुसार ड्रेजिंग कर सिल्ट हटाने के निर्देश भी दिए गए, ताकि जल प्रवाह सुचारु बना रहे और बाढ़ का खतरा कम किया जा सके।