उरई के सिरसा कलार थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां हाईकोर्ट से उम्रकैद की सजा पाए 70 वर्षीय वृद्ध ने बुधवार रात नलकूप की कोठी में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि हाल ही में सजा बरकरार रहने की जानकारी मिलने के बाद वह मानसिक तनाव में थे।
जानकारी के अनुसार, मृतक अमर सिंह को पिथऊपुर गांव में 1984 में हुए दोहरे हत्याकांड के मामले में दोषी ठहराया गया था। इस पुराने मामले में गांव के ही सरवन ठाकुर और वीरेंद्र सिंह की मंदिर में सोते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद बाबूराम ने अमर सिंह, बाबूराम, रामलखन और समरथ सिंह के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
मुकदमे में वर्ष 1987 में अदालत ने अमर सिंह, बाबूराम और समरथ सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जबकि रामलखन को बरी कर दिया गया था। बाद में हाईकोर्ट से अपील के दौरान सभी को जमानत मिल गई थी और वे लंबे समय से बाहर थे।
परिजनों के मुताबिक, हाल ही में चार मई को हाईकोर्ट ने अमर सिंह की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी, जिसकी जानकारी उनके वकील ने उन्हें दी थी। इसके बाद से ही वह काफी परेशान रहने लगे थे और जेल जाने के डर से मानसिक रूप से टूट गए थे।
मृतक के पुत्र रविंद्र सिंह ने बताया कि पिता लगातार यही कह रहे थे कि इस उम्र में वह दोबारा जेल नहीं जाना चाहते। परिजनों ने उन्हें समझाने की कोशिश की थी, लेकिन बुधवार रात वह घर से नलकूप की कोठी पर चले गए और वहीं फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थाना प्रभारी वरुण प्रताप सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला मानसिक तनाव का लग रहा है, हालांकि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।