नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत ने प्रशासनिक व्यवस्था और रेस्क्यू सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब युवराज दलदल में फंसा जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा था, उस वक्त पुलिस, फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों समेत करीब पांच टीमें और 80 से अधिक जवान मौके पर मौजूद थे। युवराज लगातार मदद की गुहार लगाता रहा—“हेल्प मी, प्लीज मुझे बचा लो”—लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी।

प्रत्यक्षदर्शी मुनेंद्र के अनुसार, किसी भी रेस्क्यू टीम के पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे। न तो मजबूत रस्सियां थीं और न ही रबर ट्यूब या फ्लोटेशन उपकरण, जिनकी मदद से युवराज तक आसानी से पहुंचा जा सकता था। वह गाड़ी पर खड़े होकर जोर-जोर से चिल्ला रहा था कि उसे दलदल से बाहर निकाला जाए। यह पूरी घटना उसके पिता राजकुमार मेहता अपनी आंखों के सामने होते हुए देख रहे थे। जब तक सभी एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय हो पातीं, तब तक युवराज गहरे दलदल में समा चुका था और उसकी सांसें थम चुकी थीं।

करीब पांच घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान रस्सी फेंकने की कोशिश जरूर की गई, लेकिन बिना किसी सहायक उपकरण के वह प्रयास नाकाम रहा। क्रेन जैसी भारी मशीनों का भी सहारा लिया गया, पर कोई सफलता नहीं मिली। एसडीआरएफ के पास नाव या बोट जैसी बुनियादी सुविधा तक मौजूद नहीं थी, जिससे पानी में उतरकर युवराज तक पहुंचा जा सके।

इस पूरे मामले में नोएडा प्राधिकरण और सिंचाई विभाग की लापरवाही भी सामने आई है। वर्ष 2023 में नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-150 में करोड़ों रुपये की लागत से सीवर लाइन बिछाने का दावा किया था, लेकिन जांच में सामने आया कि सोसाइटी से निकलने वाला गंदा पानी नालों के बजाय एक गहरे गड्ढे में जमा हो रहा था। बताया गया कि यह काम सिंचाई विभाग को जानकारी दिए बिना किया गया। सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी थी कि सीवर लाइन को उचित ड्रेनेज सिस्टम से जोड़ा जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। परिणामस्वरूप रोजाना लाखों लीटर पानी खाली पड़े भूखंडों और ग्रीन बेल्ट में भरता रहा और समय के साथ 70 फीट गहरा गड्ढा बन गया, जिसमें आखिरकार 27 वर्षीय युवराज की जान चली गई।

इस घटना ने न सिर्फ प्रदेश बल्कि देशभर में सिस्टम की खामियों को उजागर कर दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लेते हुए पांच सदस्यीय एसआईटी के गठन के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने नोएडा विधायक पंकज सिंह से फोन पर बात कर पीड़ित परिवार से मिलने का संदेश भी भिजवाया है। हालांकि, अभी मुलाकात की तारीख तय नहीं हुई है।

वहीं, युवराज के पिता राजकुमार मेहता का कहना है कि उन्हें किसी मुआवजे की अपेक्षा नहीं है। उनकी सिर्फ एक ही मांग है कि जिन अधिकारियों और विभागों की लापरवाही के कारण उनका बेटा जान गंवा बैठा, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।