मेरठ: भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एंटी करप्शन टीम ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए राजकीय निर्माण निगम के एक जूनियर इंजीनियर और उसके चालक को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों को मौके से हिरासत में लेकर मेडिकल थाने लाया गया, जहां उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।

तीन साल से लंबित था ठेकेदार का भुगतान

जानकारी के अनुसार, ठेकेदार सत्येंद्र सिंह तोमर राजकीय निर्माण निगम में निर्माण कार्यों से जुड़े हैं। उन्होंने वर्ष 2023 में एक परियोजना का कार्य पूरा किया था, लेकिन उसका भुगतान पिछले तीन वर्षों से लंबित बताया जा रहा था। आरोप है कि भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और बिल पास कराने के बदले जूनियर इंजीनियर योगेंद्र कुमार ने एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि रकम न देने पर बिल रोकने की धमकी दी जा रही थी।

शिकायत के बाद बिछाया गया जाल

पीड़ित ठेकेदार ने दो दिन पहले एंटी करप्शन विभाग से इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के सत्यापन के बाद टीम ने ट्रैप की योजना बनाई। मंगलवार को तय रणनीति के तहत शिकायतकर्ता रिश्वत की राशि लेकर पहुंचा। आरोप है कि जूनियर इंजीनियर ने सीधे पैसे लेने के बजाय अपने चालक नीरज को रकम लेने के लिए भेजा।

चालक को मौके पर पकड़ा गया

जैसे ही चालक ने शिकायतकर्ता से एक लाख रुपये लिए, पहले से तैनात एंटी करप्शन टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर टीम जूनियर इंजीनियर तक पहुंची। बताया जा रहा है कि टीम को देखते ही आरोपी वहां से भागने लगा।

पीछा कर इंजीनियर गिरफ्तार

एंटी करप्शन टीम ने करीब सौ मीटर तक पीछा कर जूनियर इंजीनियर योगेंद्र कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद दोनों को हिरासत में लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी की गई।

मुकदमा दर्ज, जांच जारी

एंटी करप्शन प्रभारी निरीक्षक दुर्गेश कुमार ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ मेडिकल थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है। आगे की विधिक कार्रवाई जारी है और दोनों को न्यायालय में पेश किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।