मुजफ्फरनगर। तितावी गांव में बीती 20 अगस्त को आवारा सांड ने खेत में काम कर रहे राजवीर सिंह किसान को टक्कर मारकर मौत के घाट उतार दिया था। उसके बाद से ही लगातार ग्रामवासियों में दहशत का माहौल है। गाँव वासी बारूमल ने जानकारी देते हुए बताया कि राजवीर की हत्या के बाद किसान अपने खेतों पर काम करने के लिए नहीं पहुंच रहे हैं। हर वक्त आवारा सांडों का डर रहता है। उन्होंने बताया कि खेत पर काम करने के लिए गांव के किसान 4-5 का समूह बनाकर जाते हैं। उन्होंने गौशालाओं पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि गौशाला वाले भी इन आवारा सांडों को रास्ते व जंगलों में छोड़ देते हैं।
आवारा सांड के हमले में मारे गए राजवीर सिंह की भतीजी कमला ने बताया कि उस दिन के बाद से ही गांव वासियों में आवारा सांडों को लेकर खौफ बना हुआ है। उन्होंने बताया कि आवारा सांड जब खेतों में जाते हैं तो फसलें भी बर्बाद कर देते है और अकेले आदमी को लहूलुहान कर मार देते हैं। अभी तक शासन प्रशासन की ओर से उन्हें किसी तरह की कोई मदद नहीं मिली है। चाचा के अंतिम संस्कार से पहले एसडीएम आए थे और मुआवजे के लिए कहा था। लेकिन आज 11 दिन का समय बीत चुका है और सरकार का कोई नुमाइंदा उनकी मदद करने के लिए नहीं आया है। उन्होंने कहा कि अभी तक प्रशासन के द्वारा आवारा सांडों पर कोई कार्यवाही भी नहीं की गई है। कमला ने बताया कि इस घटना के बाद से गांव का कोई किसान अपने खेतो पर नहीं जाता। आवारा पशु खेतों में उत्पात मचा रहे हैं।
गांव तीतावी निवासी बरूमल 20 अगस्त को राजवीर सिंह की हुई हत्या का जिक्र करते हुए सिहर जाते हैं और कहते हैं कि बहुत खतरनाक घटना थी। उन्होंने बताया कि आवारा सांड में राजवीर के कमर में सींग देकर पसलियों में को निकाल दिया था। उसके बाद भी आवारा सांड में उनको उठाकर पटका जिस वजह से उनका सिर भी टूटा हुआ था। उन्हें कहा कि राजवीर की हत्या के बाद भी गांव में कोई हालात नहीं बदले हैं। अब भी सैकड़ों की संख्या में आवारा सांड वह पशु जंगलों में घूमते रहते हैं जो फसलों के साथ-साथ किसानों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी गांव में एक युवक पर आवारा सांड में हमला कर दिया था। बारू मल ने बताया कि कोई भी किसान अकेला अपने खेत पर नहीं जा सकता। गांव के किसान समहू बना कर अपने खेत पर काम करने के लिए जाते है। उन्होंने जिला प्रशासन से आवारा पशुओ से छुटकारे की मांग की।