मुजफ्फरनगर पुलिस ने किसानों को मिलने वाली सरकारी सब्सिडी वाली यूरिया खाद को अवैध तरीके से फैक्ट्रियों तक पहुंचाने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पूरे मामले का खुलासा एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने पुलिस लाइन सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में किया।

जानसठ पुलिस और एसओजी की संयुक्त कार्रवाई

एसएसपी के अनुसार, थाना जानसठ पुलिस और एसओजी देहात की संयुक्त टीम ने इस नेटवर्क का पर्दाफाश किया। जांच में सामने आया कि गिरोह किसानों के लिए निर्धारित सस्ती यूरिया को अवैध रूप से खरीदकर उसे औद्योगिक उपयोग के लिए हरियाणा के यमुनानगर स्थित प्लाईवुड उद्योगों में भेजता था।


कीमत के अंतर से कमाई का खेल

पुलिस जांच में पता चला है कि प्लाईवुड उद्योगों में उपयोग होने वाला तकनीकी ग्रेड यूरिया महंगा होता है, जबकि किसानों को मिलने वाली सब्सिडी वाली यूरिया अपेक्षाकृत सस्ती होती है। आरोपी इसी कीमत के अंतर का फायदा उठाकर बड़ी अवैध कमाई कर रहे थे।

15 लाख किलो से ज्यादा यूरिया की कालाबाजारी का खुलासा

एसएसपी ने बताया कि पिछले छह महीनों में लगभग 15.12 लाख किलोग्राम अनुदानित यूरिया की कालाबाजारी के प्रमाण मिले हैं। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 20,430 किलोग्राम यूरिया (454 कट्टों में भरी), एक कैंटर, दो पिकअप वाहन, एक कार और कई फर्जी बिल बरामद किए हैं।

फर्जी बिल और रैकेट का पूरा नेटवर्क उजागर

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य खाद विक्रेताओं से सीधे संपर्क कर अधिक कीमत पर यूरिया खरीदते थे और फिर फर्जी बिल तैयार कर उसे हरियाणा भेजते थे। रास्ते में पुलिस और निगरानी से बचने के लिए मालवाहक वाहनों के आगे एक कार को रेकी के लिए लगाया जाता था।

यूपी-हरियाणा कनेक्शन, आगे की जांच जारी

गिरफ्तार आरोपियों में उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई जिलों के लोग शामिल हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों, सप्लाई चेन और संबंधित फैक्ट्री संचालकों की भूमिका की गहन जांच कर रही है, ताकि पूरे गिरोह का पूरी तरह से पर्दाफाश किया जा सके।