विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने बताया है कि देश की 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा की संयुक्त बैठक में यह फैसला लिया गया है कि यदि केंद्र सरकार आगामी बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) विधेयक-2025 को संसद में लाने या पारित कराने की कोशिश करती है, तो इसके खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध किया जाएगा। इस आंदोलन में किसान, मजदूर, बिजली कर्मचारी और इंजीनियर मिलकर देशभर में सड़कों पर उतरेंगे।
संघर्ष समिति के अनुसार, मंगलवार रात हुई ऑनलाइन बैठक में तय किया गया कि बिजली के निजीकरण और इस प्रस्तावित कानून को एकतरफा लागू करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ तुरंत और व्यापक कार्रवाई की जाएगी। इसमें एटक की महासचिव अमरजीत कौर, इंटक के अशोक सिंह, सीटू के तपन सेन, संयुक्त किसान मोर्चा के डॉ. दर्शन पाल समेत कई प्रमुख श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन और संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारी पिछले 427 दिनों से निजीकरण के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे ही पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से जुड़ा टेंडर जारी होगा, राज्यभर में सामूहिक जेल भरो आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।
संघर्ष समिति का कहना है कि बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपने से आम उपभोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों के हित प्रभावित होंगे, इसलिए इस फैसले के खिलाफ आंदोलन और तेज किया जाएगा।