अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए तथ्य सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में श्रीराम जन्मभूमि परिसर में लंबे समय से तैनात रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (आरएमओ) अर्जुन देव को उनके पद से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब मामले की जांच कर रही एसआईटी और पुलिस सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
जानकारी के अनुसार, अर्जुन देव पिछले करीब 17 वर्षों से अयोध्या में तैनात थे। मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती रही है। विशेष रूप से चढ़ावे की गणना वाले कक्ष और पूरे मंदिर परिसर में लगे बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी की जिम्मेदारी भी उनके पास थी।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि कड़ी सुरक्षा और व्यापक निगरानी व्यवस्था के बावजूद कथित तौर पर चढ़ावे की चोरी कैसे होती रही। इसी कारण सुरक्षा तंत्र के संचालन और निगरानी से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई गई है।
सूत्रों के अनुसार, जांच में यह भी देखा जा रहा है कि निगरानी प्रणाली में कहीं कोई तकनीकी या प्रशासनिक कमी तो नहीं रही, जिसके चलते लंबे समय तक अनियमितताओं का पता नहीं चल सका।
17 साल की तैनाती भी जांच के दायरे में
सूत्र बताते हैं कि अर्जुन देव का कई बार तबादला प्रस्तावित हुआ था, लेकिन विभिन्न कारणों से वह लागू नहीं हो सका। हाल के वर्षों में भी उनके स्थानांतरण के आदेश जारी होने के बाद निरस्त किए जाने की चर्चा रही है।
अब जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि एक ही स्थान पर उनकी लंबी तैनाती के पीछे क्या कारण रहे और किन स्तरों पर उनके तबादले रुकते रहे।
जिम्मेदारियों और संपर्कों की पड़ताल
जांच में सामने आया है कि अर्जुन देव की भूमिका केवल वायरलेस संचार और सुरक्षा निगरानी तक सीमित नहीं थी। बताया जा रहा है कि वह वीआईपी दर्शन व्यवस्था समेत मंदिर प्रशासन से जुड़े अन्य कार्यों में भी सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं।
एसआईटी उनसे पूछताछ कर चुकी है और अब उनके अधिकार क्षेत्र, जिम्मेदारियों तथा ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों और कर्मचारियों के साथ उनके कार्य संबंधों की भी समीक्षा की जा रही है।
ट्रस्ट व्यवस्था पर भी मंथन
इधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न स्तरों पर रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। सूत्रों के मुताबिक, मंदिर प्रबंधन और उससे जुड़े तंत्र की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जा रही है। साथ ही भविष्य में व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी तथा जवाबदेह बनाने के लिए संभावित बदलावों पर भी विचार किया जा रहा है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि सभी संबंधित पक्षों से पूछताछ, दस्तावेजों की जांच और तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।