संभल: संभल में हुई हालिया हिंसा के मामले में तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी और तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर समेत 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं हो पाई है। पुलिस प्रशासन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ अब उच्च न्यायालय में अपील दाखिल करने की तैयारी कर रहा है। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि पुलिस आदेश को निरस्त कराने की मांग करेगी, क्योंकि उनके अनुसार हिंसा के दौरान कोई गोली पुलिस की ओर से नहीं चली।

पुलिस का कहना है कि युवक को लगी गोली भी पुलिस की नहीं है और पिता द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं। अनुज चौधरी को प्रमोशन मिलने के बाद फिरोजाबाद में एएसपी के पद पर तैनात किया गया है, जबकि अनुज तोमर वर्तमान में चंदौसी कोतवाली में हैं।

यामीन, खग्गू सराय के निवासी, ने अनुज चौधरी और अनुज तोमर को नामजद किया है। इसके अलावा 15 से 20 अज्ञात पुलिसकर्मियों पर भी बवाल में गोली चलाने का आरोप लगाया गया है। यामीन का दावा है कि उनके बेटे आलम को पुलिस की तीन गोलियां लगीं और उन्हें आरोपित बनाया गया, जबकि आलम सुबह अपने बिस्किट ठेले के साथ ही बाहर निकला था।

परिवार का दर्द और आरोप

यामीन के अनुसार आलम को छिपकर इलाज कराना पड़ा, तभी उसकी जान बच सकी। परिवार ने कहा कि गोली लगने के बाद आलम पूरी तरह कमजोर हो गया है और आर्थिक हालात भी खराब हो गए हैं। आलम की बहन रजिया ने बताया कि उनका भाई पहले से ही दिव्यांग है और तीन पहिये के ठेले से बिस्किट बेचता था। इलाज के खर्च में परिवार को उधार तक लेना पड़ा।

रजिया ने आगे कहा कि एक वर्ष से पूरा परिवार परेशान है, पुलिस घर पर आती है और धमकाती है। उनके पिता और भाई कई बार घर से चले गए हैं, और पूरा परिवार भयभीत है।

अधिकारियों का पक्ष

डीएम और एसपी ने सभी आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि हिंसा सुबह 7:45 बजे शुरू हुई थी और भीड़ ने ही बवाल किया था। उनके अनुसार ठेले के जरिए युवक का सीधे घटना स्थल पर पहुंचना असंभव था, क्योंकि पुलिस-प्रशासन ने तीन स्तरों की सुरक्षा व्यवस्था की थी।