देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य में लघु, मध्यम और बड़े पैमाने की परियोजनाओं के लिए भू-स्वामियों से आपसी सहमति के आधार पर भूमि प्राप्ति की नई व्यवस्था को मंजूरी दी है। इस कदम से परियोजनाओं के लिए भूमि प्राप्ति की प्रक्रिया तेज होगी और भू-स्वामियों को भी जल्द मुआवजा मिलेगा।

सड़क, बांध और अन्य निर्माण परियोजनाओं के लिए सामान्यतः भूमि अधिग्रहण में लंबी प्रक्रिया होती है। इसमें योजना के लिए भूमि की पहचान, अधिग्रहण नोटिफिकेशन, विज्ञापन और मुआवजा वितरण जैसी कई औपचारिकताएं शामिल हैं, जिससे कभी-कभी एक साल या उससे अधिक समय लग जाता है।

अब कैबिनेट द्वारा प्रस्तावित नई व्यवस्था से कार्यदायी एजेंसी और भू-स्वामियों को एक और विकल्प मिलेगा। इसके तहत अगर भूमि की जरूरत होती है, तो एजेंसी सीधे भू-स्वामी से संपर्क करेगी और शहरी या ग्रामीण क्षेत्र के मुआवजे के प्रावधानों के आधार पर मूल्य तय करेगी।

यदि दोनों पक्ष सहमत हो जाते हैं, तो भूमि की रजिस्ट्री और मुआवजे का भुगतान सीधे भू-स्वामियों को किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया से पारंपरिक भूमि अधिग्रहण की तुलना में तीन से चार गुना कम समय लगेगा, मुआवजा जल्द मिलेगा और मुकदमेबाजी में भी कमी आएगी।

राज्य सचिव राजस्व एस. एन. पांडे ने बताया कि परियोजनाओं के लिए भूमि प्राप्त करना अब आसान होगा और इससे निर्माण लागत में भी कमी आएगी।