प्रयागराज। मौनी अमावस्या के पावन स्नान पर्व पर संगम नगरी में कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के काफिले को पुलिस ने संगम तट की ओर बढ़ने से रोक दिया। घटना के बाद मेला क्षेत्र में अफरा-तफरी और गहमा-गहमी का माहौल बन गया।

पुलिस प्रशासन का कहना है कि मौनी अमावस्या के अवसर पर भारी भीड़ को देखते हुए पूरे मेला क्षेत्र को ‘नो व्हीकल जोन’ घोषित किया गया है। इसी कारण किसी भी प्रकार के काफिले या रथ को आगे जाने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। जब शंकराचार्य के काफिले को रोका गया तो उनके समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, जो बाद में धक्का-मुक्की में बदल गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने समर्थकों को पीछे हटाया, जिससे संत समाज में नाराजगी देखी गई।

शंकराचार्य के संगम जाने को लेकर मेला क्षेत्र में काफी देर तक असमंजस की स्थिति बनी रही। सुरक्षा के मद्देनजर मेला प्रशासन ने मीडिया कर्मियों को भी वहां से हटाना शुरू कर दिया। अधिकारियों के अनुसार शंकराचार्य ने पैदल संगम जाने की इच्छा जताई थी, लेकिन उनके साथ बड़ी संख्या में अनुयायी होने के कारण भगदड़ की आशंका बनी हुई थी। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति रथ या काफिले को संगम तट तक ले जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।

सुबह 9 बजे तक डेढ़ करोड़ श्रद्धालुओं ने किया स्नान

मौनी अमावस्या के अवसर पर माघ मेले का सबसे बड़ा स्नान पर्व देर रात 12 बजे से ही शुरू हो गया था। घने कोहरे के बीच संगम क्षेत्र के सभी घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भोर तीन बजे के बाद संगम नोज पर श्रद्धालुओं का दबाव तेजी से बढ़ा। कोहरे के कारण कई श्रद्धालु रास्ता भटक गए, जिन्हें पुलिस और स्वयंसेवकों ने मार्गदर्शन देकर घाटों तक पहुंचाया।

मेला प्रशासन के अनुसार सुबह आठ बजे तक एक करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके थे, जबकि नौ बजे तक यह आंकड़ा बढ़कर करीब डेढ़ करोड़ तक पहुंच गया। प्रशासन का अनुमान है कि शाम तक लगभग साढ़े तीन करोड़ श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगे।