उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों का आंदोलन शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को हटाने की मांग को लेकर तेज हो गया है। इसके तहत अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने 3 मई को लखनऊ में रैली और विधानसभा तक मार्च करने का कार्यक्रम घोषित किया है।
महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि पहला चरण 9 से 15 मार्च तक चलेगा, जिसमें प्रदेश के सभी शिक्षक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष को ई-मेल और पोस्टकार्ड के माध्यम से टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ पत्र भेजेंगे। इसके बाद 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलूस निकाला जाएगा।
महासंघ के संयोजक अनिल यादव ने कहा कि यदि मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो तीन मई को राजधानी के ईको गार्डन में बड़ी रैली का आयोजन किया जाएगा और इसके बाद विधानसभा तक मार्च किया जाएगा। उन्होंने यह भी चेताया कि इसके बाद भी अगर समाधान नहीं हुआ, तो मानसून सत्र में दिल्ली में संसद भवन का घेराव किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही राजधानी में सभी शिक्षक संगठनों की बैठक आयोजित की जाएगी।
धर्मेंद्र प्रधान के बयान पर नाराजगी
शिक्षक-कर्मचारी संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के उस बयान पर कड़ी नाराजगी जताई है, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि टीईटी की अनिवार्यता पर विचार केवल तब होगा जब उनकी सरकार बनेगी। महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय और विजय कुमार बंधु ने इसे सौदेबाजी करार दिया।
महासंघ को अन्य शिक्षक संघों का समर्थन
अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ को कई अन्य शिक्षक संगठनों का भी समर्थन प्राप्त है। महासंघ के प्रदेश महासचिव दिलीप चौहान ने बताया कि इस आंदोलन में उत्तर प्रदेश शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ला, प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय सिंह, वैचारिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश सिंह, और एससीएसटी टीचर्स संघ के प्रदेश महामंत्री वेद प्रकाश सरोज ने समर्थन पत्र भेजे हैं।