लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार सरकारी अधिवक्ताओं की फीस और रिटेनरशिप में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। प्रस्ताव के अनुसार, न्यायालयों में सरकार की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं की फीस और मासिक रिटेनरशिप में लगभग 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की जा सकती है।

इस संबंध में प्रस्ताव बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है।

सूत्रों के अनुसार, जिला न्यायालयों में कार्यरत शासकीय अधिवक्ताओं की रिटेनरशिप वर्ष 2016 से और महाधिवक्ता की रिटेनरशिप वर्ष 2012 से संशोधित नहीं की गई है, जिसे देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है।

प्रस्तावित बदलाव के तहत जिला शासकीय अधिवक्ताओं की मासिक रिटेनरशिप 9,000 रुपये से बढ़ाकर लगभग 14,000 रुपये की जा सकती है, जबकि प्रति सुनवाई मिलने वाली फीस 1,650 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये तक किए जाने की संभावना है।

इसी तरह अपर जिला शासकीय अधिवक्ताओं (एडीजीसी) की रिटेनरशिप 7,200 रुपये से बढ़ाकर 11,000 रुपये तथा प्रति सुनवाई फीस 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,300 रुपये किए जाने का प्रस्ताव है।

महाधिवक्ता की मासिक रिटेनरशिप को 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये तक करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही उनकी बहस फीस 40,000 रुपये से बढ़ाकर 60,000 रुपये तक किए जाने की संभावना है। अपर महाधिवक्ताओं की रिटेनरशिप और फीस में भी करीब 50 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव है।

सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखने वाले अधिवक्ताओं की रिटेनरशिप और प्रति सुनवाई फीस बढ़ाने का भी प्रस्ताव कैबिनेट के एजेंडे में शामिल है।

इसके अलावा खाद्य एवं रसद विभाग की मक्का क्रय नीति, कारागार विभाग, सिंचाई, आबकारी, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति, स्वास्थ्य, नागरिक सुरक्षा, कृषि तथा स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग से जुड़े कई अन्य प्रस्ताव भी बैठक में रखे जाएंगे।

सूत्रों के अनुसार, मुरादाबाद, औरैया, ललितपुर, कानपुर नगर और भदोही में नई जेलों के निर्माण के लिए धनराशि जारी किए जाने पर भी कैबिनेट में निर्णय लिया जा सकता है।