प्रयागराज की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसले में पूर्व विधायक और बाहुबली नेता विजय मिश्रा सहित चार आरोपियों को 46 साल पुराने हत्या मामले में कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने 11 फरवरी 1980 को कचहरी परिसर में हुई हत्या के मामले में सभी आरोपियों को दोषी करार दिया।

अदालत ने विजय मिश्रा, जीत नारायण, संतराम और बलराम को दोषी मानते हुए प्रत्येक पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। फैसला विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार तृतीय की अदालत ने सुनाया। विजय मिश्रा को आगरा जेल से कड़ी सुरक्षा के बीच पेश किया गया, जबकि अन्य आरोपियों को पहले ही हिरासत में लिया जा चुका था।

कचहरी परिसर में हुई थी वारदात

मामला वर्ष 1980 का है, जब इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र प्रकाश नारायण पांडेय जमानत संबंधी कार्य के लिए जिला कचहरी पहुंचे थे। पुरानी रंजिश के चलते वहां विजय मिश्रा और उनके साथियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें 35 वर्षीय प्रकाश नारायण की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना में पांच अन्य लोग भी घायल हुए थे। मृतक के भाई की तहरीर पर कर्नलगंज थाने में मामला दर्ज किया गया था।

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद फैसला

इस चर्चित मामले में कई बार सुनवाई में बाधाएं आईं और आरोप भी लगे कि दस्तावेजों को गायब कर मामले को प्रभावित करने की कोशिश की गई। हालांकि, अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराया। कोर्ट ने हत्या के मामले में धारा 302 के तहत उम्रकैद और 307 के तहत 10-10 साल की अतिरिक्त सजा सुनाई है।

कड़ी सुरक्षा के बीच सुनाया गया फैसला

फैसले के दौरान कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। भारी पुलिस बल की तैनाती की गई ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न उत्पन्न हो। फैसले के बाद सभी दोषियों को जेल भेज दिया गया। लगभग चार दशक से अधिक समय बाद आए इस निर्णय को मामले में बड़ा मोड़ माना जा रहा है।