हरदोई: पुरवा गांव, बेहटा गोकुल थाना क्षेत्र – लगभग 65 साल पहले 15 साल की उम्र में डकैतों द्वारा उठाई गई किशोरी आखिरकार अपने मायके लौटी। इस बार वह अपनी बेटी के साथ आईं। वृद्ध महिला के आगमन पर परिजन और ग्रामीणों में उत्सुकता और खुशी की लहर दौड़ गई।

वृद्धा लगभग 36 घंटे गांव में रहीं और अपने पुराने घर, शंकरजी मंदिर और अपने पिता और भाइयों के नामों की यादें ताज़ा की। बेटी ने अपनी मां की वर्षों पुरानी ख्वाहिश पूरी की और उसके मायके जाने की इच्छा को साकार किया।

65 साल पहले की घटना
बलदेव परिवार उस समय पुरवा गांव में रहता था। बताया जाता है कि वर्ष 1961 में एक रात डकैतों ने परिवार पर हमला किया। नकदी या जेवरात नहीं मिलने पर उन्होंने बलदेव और परिवार के अन्य सदस्यों को घायल कर दिया और 15 साल की बेटी मिठनी को उठाकर ले गए। बाद में मिठनी को अलीगढ़ के एक व्यक्ति के पास छोड़ दिया गया।

अलीगढ़ में मिठनी को छुड़ाने के बाद उस व्यक्ति ने मिठनी से विवाह किया। मिठनी के परिवार में पांच बेटियां और तीन बेटे थे। अपनी जिंदगी के दौरान मिठनी अक्सर अपने मायके और परिवार की बातें बच्चों को सुनाती रहीं।

मायके की यात्रा
हाल ही में मिठनी की छोटी बेटी सीमा ने निर्णय लिया कि अपनी मां को उनके पुराने घर और परिजनों से मिलवाना चाहिए। शुक्रवार को सीमा ने मिठनी को लेकर सकाहा स्थित शिवमंदिर पहुंची और वहां से पूछताछ करते हुए आटदानपुर पहुंचीं, जहां उनका परिवार अब रहता है।

मिठनी को छोटे भाई शिवपाल की पत्नी ने घटनाक्रम और परिवार का हाल बताया। उनका अन्य भाई और पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों से मिलने के बाद मिठनी की झुर्रियों भरी मुस्कान में राहत और खुशी साफ दिखाई दी। शनिवार की शाम, मिठनी अपनी बेटी के साथ नोएडा लौट गईं।