लखनऊ स्थित लोक भवन में रविवार को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार हुआ। दोपहर 3:30 बजे शुरू हुए शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कुल आठ मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

इस विस्तार में दो नेताओं को कैबिनेट मंत्री और दो को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शपथ दिलाई गई, जबकि चार नेताओं को राज्य मंत्री बनाया गया है।

किन नेताओं को मिला क्या पद

कैबिनेट मंत्री के रूप में भूपेन्द्र चौधरी और मनोज कुमार पांडेय ने शपथ ली। इसके अलावा डॉ. सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल को राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार की जिम्मेदारी दी गई।

वहीं कृष्णा पासवान, कैलाश सिंह राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की।

सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर फोकस

इस विस्तार में सामाजिक संतुलन को साधने की कोशिश दिखाई दी है। पहली बार मंत्री बने नेताओं में कई नए चेहरे शामिल हैं।

हंसराज विश्वकर्मा (वाराणसी) को एमएलसी के रूप में मौका मिला है, वहीं कृष्णा पासवान (फतेहपुर), सुरेंद्र दिलेर (अलीगढ़) और कैलाश सिंह राजपूत (कन्नौज) को पहली बार राज्य मंत्री बनाया गया है।

पहले से अनुभव वाले नेताओं को भी मिला प्रमोशन

मेरठ दक्षिण से विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर और कानपुर देहात के अजीत पाल को पदोन्नत करते हुए राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी दी गई है।

भूपेन्द्र चौधरी, जो पहले योगी सरकार में पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं, उन्हें एक बार फिर कैबिनेट में जगह मिली है।

वहीं मनोज कुमार पांडेय, जो पहले समाजवादी पार्टी सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं, अब योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने हैं।

यूपी सरकार में मंत्रियों की स्थिति

वर्तमान में योगी सरकार 2.0 में मुख्यमंत्री, दो उपमुख्यमंत्री सहित कुल 21 कैबिनेट मंत्री हैं। इसके अलावा 14 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 18 राज्य मंत्री कार्यरत हैं।

संवैधानिक सीमा के अनुसार यूपी में अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस विस्तार के बाद बिना किसी को हटाए नए मंत्रियों को शामिल किया गया है।

पहले भी हुआ था विस्तार

इससे पहले मंत्रिमंडल का पहला विस्तार 5 मार्च 2024 को लोकसभा चुनाव से पहले हुआ था। उस समय चार नए कैबिनेट मंत्री बनाए गए थे, जिनमें ओम प्रकाश राजभर, दारा सिंह चौहान, अनिल कुमार और सुनील कुमार शर्मा शामिल थे।

बाद में लोकसभा चुनाव के बाद जितिन प्रसाद के केंद्र सरकार में शामिल होने से कैबिनेट की संख्या घटकर वर्तमान में 21 रह गई।