चारधाम यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए इस बार आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) को भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया जाएगा। यात्रा मार्गों और धाम परिसरों में आने वाले यूट्यूबर और ब्लॉगर्स की गतिविधियों पर भी पुलिस की कड़ी नजर रहेगी। इस संबंध में पुलिस महानिदेशक (DGP) दीपम सेठ ने अधिकारियों को सभी एसओपी का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।

यात्रा से पहले तैयारियों की समीक्षा और निरीक्षण के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती की गई है। इसमें दो एडीजी और चार आईजी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। गढ़वाल आईजी को चारधाम यात्रा का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। डीजीपी ने बताया कि चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए उत्तराखंड पुलिस पूरी तरह तैयार है और अधिकांश व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गई हैं। इसी विषय पर पुलिस मुख्यालय में उच्चस्तरीय बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।

निरीक्षण कार्यक्रम के तहत एडीजी लॉ एंड ऑर्डर डॉ. वी. मुरुगेशन गंगोत्री धाम, एडीजी एपी अंशुमान बद्रीनाथ धाम, आईजी विम्मी सचदेवा हरिद्वार, आईजी एसटीएफ डॉ. नीलेश आनंद भरणे केदारनाथ धाम, आईजी अनंत शंकर ताकवाले यमुनोत्री धाम तथा आईजी सुनील कुमार मीणा ऋषिकेश, लक्ष्मण झूला और मुनि की रेती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेंगे। ये अधिकारी सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, पार्किंग, भीड़ नियंत्रण, रजिस्ट्रेशन केंद्र, टोकन व्यवस्था और पुलिस बल की तैनाती जैसी व्यवस्थाओं की समीक्षा करेंगे।

यात्रा मार्गों की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को परखने के लिए एटीएस टीमों के साथ संयुक्त मॉक ड्रिल भी कराई जाएगी। डीजीपी के अनुसार, संवेदनशील स्थानों जैसे लैंडस्लाइड जोन और संकरे मार्गों की पहचान कर ली गई है ताकि जोखिम को कम किया जा सके। यातायात नियंत्रण के लिए मोटरसाइकिल पेट्रोलिंग के साथ आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा।

जारी किए गए प्रमुख निर्देश

  • आपात स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के साथ निरंतर समन्वय रखा जाए।
  • होटल, ढाबा, टेंट, घोड़ा-खच्चर, पालकी और टैक्सी संचालकों सहित सभी सेवा प्रदाताओं का अनिवार्य सत्यापन किया जाए।
  • यात्रियों को समय-समय पर सही जानकारी देने के लिए सोशल मीडिया और मीडिया ब्रीफिंग को सक्रिय रखा जाए।
  • भ्रामक या फर्जी सोशल मीडिया पोस्ट पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए।
  • दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे से बढ़ने वाले यातायात दबाव को देखते हुए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए।
  • मंदिर परिसरों में मोबाइल और कैमरा उपयोग को लेकर जारी एसओपी का कड़ाई से पालन कराया जाए।
  • ब्लॉगर्स और यूट्यूबरों की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी जाए।
  • निजी ड्रोन संचालन पर भी निर्धारित एसओपी का पालन सुनिश्चित कराया जाए।