उत्तराखंड में आयोजित मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी 2025-26 में देहरादून जिले के खिलाड़ियों ने कमाल का प्रदर्शन करते हुए ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। जिले ने कुल 146 स्वर्ण, 92 रजत और 80 कांस्य पदक जीतकर पहली पोजिशन हासिल की।
इस ट्रॉफी का आयोजन खेल महाकुंभ के तहत 23 नवंबर 2025 से 18 फरवरी 2026 तक विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में किया गया। दूसरे स्थान पर ऊधमसिंह नगर रहा, जिसने 78 स्वर्ण समेत 255 पदक जीते। वहीं हरिद्वार जिले ने 82 स्वर्ण सहित 210 पदक अपने नाम किए।
अंतिम दिन युवा कल्याण निदेशालय में पारंपरिक खेल जैसे मलखंभ, मुर्गा झपट और पिट्टू का आयोजन हुआ। मलखंभ प्रतियोगिता में नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय छात्रावास, लालढांग के छात्र वासु, मोर सिंह, प्रिंस, मयंक और मोहित ने कोच योगेश्वर सिंह के मार्गदर्शन में शानदार प्रदर्शन किया।
रुद्रप्रयाग जिले का सबसे कमजोर प्रदर्शन
इस बार रुद्रप्रयाग जिले के खिलाड़ियों ने सबसे कमजोर प्रदर्शन किया। उन्हें केवल पांच स्वर्ण सहित कुल 14 पदक ही मिले, जिससे यह जिला पदक तालिका में सबसे नीचे रहा।
अन्य जिलों का प्रदर्शन
-
नैनीताल: 44 स्वर्ण, 154 पदक
-
पौड़ी गढ़वाल: 22 स्वर्ण, 94 पदक
-
पिथौरागढ़: 19 स्वर्ण, 82 पदक
-
टिहरी गढ़वाल: 12 स्वर्ण, 79 पदक
-
चंपावत: 8 स्वर्ण, 49 पदक
-
उत्तरकाशी: 5 स्वर्ण, 48 पदक
-
बागेश्वर: 8 स्वर्ण, 31 पदक
-
चमोली: 7 स्वर्ण, 31 पदक
छिपी प्रतिभाओं को मिला मंच
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समापन समारोह में कहा कि मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी ने प्रदेश की छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण माध्यम साबित किया है। इस प्रतियोगिता में 1.62 लाख से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।
देहरादून जिले को विजेता ट्रॉफी और पांच लाख रुपये का पुरस्कार चेक मुख्यमंत्री ने प्रदान किया। सीएम ने कहा कि यह केवल प्रतियोगिता का अंत नहीं, बल्कि उत्तराखंड के खेल भविष्य की नई शुरुआत है। पुरस्कार राशि 11 करोड़ रुपये डीबीटी के माध्यम से सीधे खिलाड़ियों के खातों में भेजी जाएगी।
सीएम ने आगे कहा कि उत्तराखंड अब आधुनिक और विश्वस्तरीय खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। स्टेडियम और प्रशिक्षण केंद्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी के लिए सक्षम हैं। प्रदेश में आठ प्रमुख शहरों में 23 खेल अकादमियां स्थापित की जाएँगी और नई खेल नीति में खिलाड़ियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कई प्रावधान किए गए हैं।
सरकारी सेवाओं में खेल आरक्षण
इस साल से खेल महाकुंभ और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी सेवाओं में आवेदन करने पर चार प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण मिलेगा। खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि यह समय प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए स्वर्णिम काल जैसा है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं और आधारभूत ढांचा उपलब्ध है। खेल विश्वविद्यालय और लोहाघाट में गर्ल्स स्पोर्ट्स कॉलेज जैसी पहलें भी की जा रही हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि यह प्रतियोगिता खिलाड़ियों को वर्ष 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 के संभावित ओलंपिक के लिए तैयारी का मंच प्रदान करती है।