देहरादून में बहुचर्चित अर्बन कोऑपरेटिव बैंक (यूसीबी) घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन बैंक प्रबंधक महावीर सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक से करोड़ों रुपये का लोन पास कराकर भारी वित्तीय गड़बड़ी को अंजाम दिया।

शहर कोतवाली पुलिस के अनुसार, महावीर सिंह निवासी तपोवन रोड, नालापानी चौक, रायपुर ने बैंक में तैनात कुछ अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से कूटरचना और धोखाधड़ी की। जांच में सामने आया है कि फर्जी एंट्री और गलत दस्तावेजों के जरिए बैंक को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।

चार करोड़ 80 लाख का फर्जी लोन मामला

प्राथमिक जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपितों ने 20 जेसीबी मशीनों की खरीद के नाम पर लगभग 4 करोड़ 80 लाख रुपये का फर्जी लोन स्वीकृत कराया। इस पूरी राशि को कथित तौर पर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर गबन किया गया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने बताया कि मामले की शिकायत 15 मई को बैंक की क्रॉस रोड स्थित मुख्य शाखा के प्रबंधक रिंकू गौतम ने दर्ज कराई थी। ऑडिट रिपोर्ट में वर्ष 2013 से 2016 के बीच बैंक खातों और लेजर रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं।

फॉरेंसिक ऑडिट से खुल रहे घोटाले के राज

मामले की गंभीरता को देखते हुए आरबीआई द्वारा कराए जा रहे फॉरेंसिक ऑडिट में भी बड़े खुलासे हो रहे हैं। रिपोर्ट में वित्तीय वर्ष 2013-14, 2014-15 और 2015-16 के दौरान रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों की पुष्टि हुई है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि बैंक के कई पूर्व और वर्तमान कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिनकी संलिप्तता की जांच जारी है।

इंजीनियर की मदद से सिस्टम में छेड़छाड़

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि कंप्यूटर सिस्टम में गलत एंट्री करने में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मदद ली गई थी। कैश बैलेंस और लेजर खातों में नियमों के खिलाफ लगातार छेड़छाड़ की जाती थी।

आरोप है कि फर्जी लेनदेन के जरिए न केवल बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया, बल्कि कई संदिग्ध संपत्तियां भी अर्जित की गईं, जिनकी जांच अभी जारी है। पुलिस इस पूरे घोटाले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।