रुड़की: अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हालिया हमलों के विरोध में शिया समुदाय के लोगों ने मंगलौर में गहरा रोष व्यक्त किया।

शिया समुदाय के अधिकांश लोग अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। लोगों ने अमेरिका और इजराइल के नेताओं के पोस्टर जमीन पर रखकर उन पर चहल-कदमी की और नारेबाजी करते हुए अपने गुस्से को जाहिर किया।

रविवार को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई और उनके परिवार के सदस्यों की मौत की खबर मिलने के बाद समुदाय के लोगों ने मस्जिदों और इमामबाड़ों में दुआ की और इसके बाद मजलिस आयोजित कर विरोध प्रदर्शन किया।

मोहल्ला हल्का स्थित आजा खाना-ए-हुसैनी मस्जिद और सकीना बिनतुल हुसैन के पास प्रदर्शन हुआ, जिसमें मौलाना इस्तखार हसन, गुलाम अब्बास, आदल जाफरी, जामीन अब्बास, सुल्तान हैदर, डॉ. सकलेन, खलील अहमद, शिफ्ते हसन, मौलाना नजमुल हसन समेत सैकड़ों लोग शामिल हुए।

शोक में डूबे शिया समुदाय के कई कारोबारी अपने प्रतिष्ठान बंद रखे और मोहल्ला पठानपुरा में अमेरिका और इजराइल के नेताओं के पोस्टरों पर चलकर विरोध व्यक्त किया।

ईरान में फंसे परिवारों की चिंता

मंगलौर कोतवाली क्षेत्र के लगभग दो दर्जन परिवार ईरान में फंसे हुए हैं, जिनके स्वजनों में चिंता की लहर है। इनमें कई लोग धार्मिक शिक्षा लेने गए हैं, जबकि कुछ वहां व्यवसाय भी कर रहे हैं।

इन परिवारों में शामिल हैं:

  • जैनपुर झंझेडर निवासी अब्दुल हसन अपनी पत्नी और बच्चों के साथ

  • मोहम्मद आरिफ, शाह राजा, साहिब अब्बास, मोहसिन अली का परिवार

  • मोहल्ला पठानपुरा निवासी यासिर, अमीर हैदर, हुज्जत अपने परिवार के साथ

  • सलमान, अलीशा गोहर, मासूका ईरान के विभिन्न शहरों में

  • मोहल्ला हल्का निवासी मौलाना गय्यूर, नाजीर मेहंदी अपनी पत्नियों के साथ

  • मोहम्मद सिकंदर, मोहम्मद शोएब, मोहम्मद इब्ने हसन, और सुरैया फातिमा अपने परिवार के साथ

मौलाना शिफ्ते हसन ने बताया कि उनका बेटा यासिर मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है और सुरक्षित है।

इस पूरे घटनाक्रम से शिया समुदाय में गहरा आक्रोश और अपने परिवारों की सुरक्षा को लेकर चिंता देखने को मिल रही है।