नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक अनोखे फैसले में 61 से अधिक मामलों का समाधान एक ही कदम में कर दिया। मामला एक पति-पत्नी के बीच पिछले दशक से चले आ रहे वैवाहिक विवाद का था, जो समय के साथ इतने अलग-अलग मुकदमों में बदल गया कि पूरे देश में 61 केस दर्ज थे। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां शामिल थे, ने संविधान के अनुच्छेद 142 का प्रयोग करते हुए सभी लंबित मामलों को समाप्त कर दिया।
अदालत ने पाया कि दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से समझौता किया है, जिसमें उनकी शादी से जुड़ी सभी अनबन और विवाद शामिल हैं। इसी के तहत दोनों को तलाक दे दिया गया और देश के सबसे जटिल वैवाहिक विवादों में से एक का अंत हुआ। यह शादी 1994 में हुई थी और पिछले लगभग दस वर्षों से दोनों अलग रह रहे थे।
समझौते की वित्तीय शर्तें
इस समझौते के अनुसार, पति को पत्नी को एक करोड़ रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता देना होगा। इसके अलावा लोनावला में स्थित एक प्रॉपर्टी का उसका हिस्सा रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड के जरिए पत्नी के नाम ट्रांसफर करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने ₹90 लाख की राशि याचिकाकर्ता को जारी करने का निर्देश दिया, ताकि वित्तीय शर्तें पूरी हो सकें।
अतीत, वर्तमान और भविष्य के सभी दावे समाप्त
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों के बीच वैवाहिक संबंध से जुड़े सभी अतीत, वर्तमान और भविष्य के दावे अब समाप्त माने जाएंगे। किसी भी पक्ष को आगे जाकर दूसरे के खिलाफ दीवानी या फौजदारी कार्यवाही करने की अनुमति नहीं होगी।
सभी लंबित मामले रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने सभी लंबित मामलों को रद्द कर दिया, जिनमें आपराधिक शिकायतें, घरेलू हिंसा से संबंधित कार्यवाही, रिट याचिकाएं, अवमानना याचिकाएं और अपीलें शामिल थीं। ये मामले ट्रायल कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे थे।
भविष्य में कोई नया मुकदमा नहीं चलेगा
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इसी मुद्दे से संबंधित भविष्य में कोई नया मुकदमा या शिकायत स्वीकार नहीं की जाएगी। दोनों पक्षों को आपसी सहमति के आधार पर अब एक-दूसरे के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई करने से रोक दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए तकनीकी और कानूनी बाधाओं को हटाया और सभी लंबित मामलों का समाधान एक ही आदेश में सुनिश्चित किया।